देहरादून में 79 जर्जर स्कूलों को ध्वस्त करने का किया गया निर्णय, 1 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
देहरादून: बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले के 79 सरकारी स्कूल भवनों को पूरी तरह जर्जर पाए जाने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने इन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। इस कार्य के लिए कुल 1 करोड़ रुपये …
देहरादून में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून जिले में 79 सरकारी स्कूलों को जर्जर स्थिति के कारण ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है। इस कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूरी दी गई है।
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देहरादून: बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 79 सरकारी स्कूल भवनों को पूरी तरह जर्जर पाए जाने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाते हुए इन स्कूलों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इस कार्य के लिए कुल 1 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।
शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में मिले गंभीर परिणाम
शिक्षा विभाग द्वारा किए गए सर्वे में कुल 104 स्कूल भवनों की जांच की गई थी। इनमें से 79 स्कूल पूरी तरह निष्प्रयोज्य (अनफिट) पाए गए, जबकि 17 स्कूल आंशिक रूप से जर्जर हैं और उनमें मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है। इसके अलावा, आठ स्कूलों में कोई ध्वस्तीकरण की जरूरत नहीं बताई गई है।
बच्चों की सुरक्षा के हित में लिए गए निर्णय
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि यह कदम छात्रों की जान को खतरे में डालने से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। जिले के 63 स्कूलों में पहले से ही वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है, जिससे इन स्कूलों को तत्काल ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया को तेजी प्रदान किया जाएगा। वहीं, शेष 16 स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
ध्वस्त होने वाले स्कूलों की सूची
ध्वस्त होने वाले स्कूलों में शामिल हैं:
- माध्यमिक स्तर के 6 स्कूल (कुछ रिपोर्टों में 13 माध्यमिक स्तर के उल्लेखित)
- प्रारंभिक स्तर के 57 स्कूल (कुछ स्रोतों में 66 प्राथमिक स्तर के)
कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे करने के लिए दिशा-निर्देश
जिलाधिकारी ने सात दिनों के अंदर पूरा एस्टीमेट मंगवाया है ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी भी जोखिमपूर्ण भवन में पढ़ाई नहीं होगी। आंशिक जर्जर भवनों में सुरक्षा मानकों के आधार पर मरम्मत और प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही
प्रशासन ने इस कार्रवाई को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बताते हुए स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग को पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे।
मरम्मत की आवश्यकता वाले स्कूल
कुछ स्कूल जहां मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है, उनमें राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कारगी, राजकीय इंटर कॉलेज सौडा सरोली (रिलेक्सो कंपनी द्वारा मरम्मत), राजकीय प्राथमिक विद्यालय संघौर, चिट्टाड़, राजकीय इंटर कॉलेज दूधली आदि शामिल हैं।
इस महत्वपूर्ण फैसले से यह स्पष्ट होता है कि देहरादून प्रशासन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति कितनी गंभीर है। इस दिशा में उठाए गए कदम न केवल बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेंगे, बल्कि उन्होंने जिस तरह से संवाद और पारदर्शिता का परिचय दिया है, वह भी प्रशंसा का पात्र है।
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