देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में अनियमितताएँ: कांग्रेस ने शोर मचाया, सीबीआई जांच की माँग

देहरादून : देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय खामियों की पोल नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में खुल गई है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने कांग्रेस के पुराने …

Mar 14, 2026 - 00:27
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देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में अनियमितताएँ: कांग्रेस ने शोर मचाया, सीबीआई जांच की माँग
देहरादून : देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय खा

देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में अनियमितताएँ: कांग्रेस ने शोर मचाया, सीबीआई जांच की माँग

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून स्मार्ट सिटी योजना में घोटाले की आशंका है, जिसमें कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की है।

देहरादून: देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय खामियों का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने उनके पहले के आरोपों की पुष्टि की है और ये अनियमितताएँ भाजपा सरकार के संरक्षण में हुई सभी से बड़ी घोटाले की ओर इशारा करती हैं।

धस्माना ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने 2017 में देहरादून को स्मार्ट सिटी के रूप में चुनते हुए 2023 तक योजना को पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन कार्यों में समय पर प्रगति न होने के कारण समय पर समय विस्तार दिया गया। 2025 में, आधे-अधूरे और निम्न स्तर के कार्यों के बावजूद, तत्कालीन सीईओ ने परियोजना के पूरा होने की घोषणा की। धस्माना ने कहा कि शहर को खोदने और बड़ी मात्रा में खर्च करने के बाद भी स्थिति पहले से और भी खराब हो गई है।

सीएजी रिपोर्ट में प्रमुख अनियमितताएँ

सीएजी रिपोर्ट (रिपोर्ट नंबर 5 ऑफ 2025) में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है, जैसे:

  • बिना टेंडर के 2.93 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए।
  • समय पर कार्य पूरा न होने पर कार्यदायी संस्थाओं से 19 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की गई।
  • 5.91 करोड़ रुपये खर्च कर तीन सरकारी स्कूलों में स्मार्ट सुविधाएँ स्थापित की गईं, लेकिन बिजली बिलों के बोझ के कारण इन्हें शुरू नहीं किया जा सका।
  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 4.55 करोड़ रुपये का बायोमेट्रिक और सेंसर-आधारित मॉड्यूल तैयार हुआ, लेकिन इसका प्रयोग जनवरी 2025 तक नहीं किया गया।
  • ई-रिक्शा और अन्य स्मार्ट वेस्ट वाहनों का संचालन खरीद के बाद दो वर्षों तक नहीं किया गया।
  • 737 करोड़ रुपये में से 634.11 करोड़ खर्च होने के बावजूद कई प्रोजेक्ट अधूरे रहे।

कांग्रेस का दावा और बीजिंग की मांग

धस्माना ने आरोप लगाया कि भूमिगत विद्युतीकरण, ट्रैफिक सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, विद्यालयों में सीसीटीवी-वाईफाई आदि पर भारी खर्च होने के बाद भी अधिकांश कार्य गैर-कार्यात्मक और निम्न गुणवत्ता के रहे। उन्होंने कहा, "यह घोटाला राज्य सरकार के संरक्षण में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों की निगरानी में हुआ है। यदि सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए तो भाजपा सरकार का वास्तव में यह सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।"

यह रिपोर्ट 10 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश की गई थी, जिसमें 2017-18 से 2022-23 तक की अवधि की समीक्षा की गई है। कांग्रेस ने सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि जनता के पैसे की बर्बादी को रोका जा सके।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे

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