नया साहसिक पर्यटन: नंदा देवी ईस्ट से पंचाचूली तक, 83 चोटियों में चढ़ाई के अवसर, बढ़ेगा टूरिज्म और अर्थव्यवस्था

रैबार डेस्क:  आम बजट में माउंटेन ट्रेल्स विकसित किए जाने की घोषणा के बाद उत्तराखंड... The post नंदा देवी ईस्ट से पंचाचूली तक, 83 चोटियों में चढ़ाई कर सकेंगे पर्वतारोही, बढ़ेगा टूरिज्म, बढ़ेगी इकोनॉमी appeared first on Uttarakhand Raibar.

Feb 3, 2026 - 18:27
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नया साहसिक पर्यटन: नंदा देवी ईस्ट से पंचाचूली तक, 83 चोटियों में चढ़ाई के अवसर, बढ़ेगा टूरिज्म और अर्थव्यवस्था
रैबार डेस्क:  आम बजट में माउंटेन ट्रेल्स विकसित किए जाने की घोषणा के बाद उत्तराखंड... The post नंदा देवी

नया साहसिक पर्यटन: नंदा देवी ईस्ट से पंचाचूली तक, 83 चोटियों में चढ़ाई के अवसर, बढ़ेगा टूरिज्म और अर्थव्यवस्था

रैबार डेस्क: हाल ही में आम बजट में माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने के फैसले के बाद, उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन को एक नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र में 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोला है। यह कदम न केवल उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर स्थापित करेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday

चोटियों की अद्वितीयता और तकनीकी चुनौतियाँ

जिन चोटियों को अब पर्वतारोहण के लिए खोला गया है, उनकी ऊँचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण चोटियाँ शामिल हैं। ये न केवल साहसिकता के प्रतीक हैं बल्कि हिमालय की भव्यता के जीवंत उदाहरण भी हैं।

आर्थिक बाधाओं को दूर करने का कदम

उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से युवाओं को आर्थिक बाधाओं से मुक्त करने पर केंद्रित है। अब भारतीय पर्वतारोहियों को किसी भी अभियान शुल्क, जैसे की पीक फीस, कैंपिंग फीस या पर्यावरण शुल्क, का भुगतान नहीं करना होगा। पहले ये शुल्क भारतीय पर्वतारोहण संस्था (IMF) और वन विभाग द्वारा लिया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार इसे वहन करेगी। इस कदम से वह युवा जो पहले आर्थिक कारणों से पीछे रह जाते थे, अब पर्वतारोहण में भाग ले सकेंगे।

विदेशी पर्वतारोहियों को भी मिलेगी राहत

वहीं विदेशी पर्वतारोहियों के लिए राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क भी समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल IMF द्वारा निर्धारित शुल्क ही चुकाना होगा। सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। यह प्रणाली डिजिटल और पारदर्शी है, जिससे अनुमति प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की पहल

प्रदेश सरकार का यह निर्णय सीमावर्ती गांवों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक साबित होगा। इससे स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में मददगार होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय हमारी पहचान है और 83 पर्वत चोटियों को खोलना साहसिक पर्यटन में राज्य को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

पर्यावरण सुरक्षा और सुरक्षा मानकों का पालन

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा सुरक्षित रहे।

केंद्रीय बजट में की गई महत्वपूर्ण घोषणा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इस बजट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने का ऐलान किया गया है। यह भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने के दिशा में एक बड़ा प्रयास है और यह साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करेगा।

कम शब्दों में कहें तो, पर्वतारोहण प्रेमियों के लिए उत्तराखंड एक नई और आकर्षक मंजिल बनने जा रहा है, जो न केवल पर्यटन को बढ़ाएगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। अधिक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें.

सादर,
टीम इंडिया टुडे, स्वाति शर्मा

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