माल्टा महोत्सव: 7000 किलो माल्टा की बिक्री से वोकल फॉर लोकल को मिला मजबूती
माल्टा महोत्सव में हुई 7000 किलो माल्टा की बिक्री माल्टा से निर्मित जूस, जैम, स्क्वैश, कैंडी जैसे उत्पादों की भी हुई सफल बिक्री सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन के तत्वावधान में महोत्सव का आयोजन महोत्सव के माध्यम से वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देहरादून: आईटीबीपी स्टेडियम, सीमा द्वार में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय […] The post माल्टा महोत्सव में हुई 7000 किलो माल्टा की बिक्री,महोत्सव के माध्यम से वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा first appeared on Vision 2020 News.
माल्टा महोत्सव: 7000 किलो माल्टा की बिक्री से वोकल फॉर लोकल को मिला मजबूती
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कम शब्दों में कहें तो: देहरादून में आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव में 7000 किलो माल्टा और उससे बनें विभिन्न उत्पादों की सफल बिक्री हुई है, जिससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।
देहरादून: आईटीबीपी स्टेडियम, सीमा द्वार में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव ने न केवल पर्वतीय किसानों के लिए एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया, बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को भी मजबूती दी है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल जैसे उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए माल्टा उत्पादक किसानों ने इस महोत्सव में भाग लिया।
इस महोत्सव के दौरान 7000 किलोग्राम से अधिक माल्टा की बिक्री के साथ-साथ माल्टा से बने जूस, जैम, स्क्वैश, कैंडी इत्यादि उत्पादों की भी प्रदर्शन व बिक्री हुई, जिससे किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिला। इस सफल बिक्री ने किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फाउंडेशन की ट्रस्टी गीता धामी का कहना है कि यह आयोजन केवल एक महोत्सव नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य पर्वतीय किसानों की मेहनत को सम्मान देना और उनकी आजीविका को सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि माल्टा जैसे स्थानीय उत्पादों को सशक्त बाजार उपलब्ध कराने के माध्यम से, फाउंडेशन किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने का प्रयास कर रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य प्राप्त होगा।
इसके अलावा, फाउंडेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बिक्री से प्राप्त धनराशि को किसानों के कल्याण, उत्पाद संवर्धन, प्रशिक्षण और विपणन जैसी गतिविधियों में लगाया जाएगा, ताकि यह पहल केवल एक आयोजन तक सीमित न हो और दीर्घकालिक परिणाम उत्पन्न कर सके।
सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन ने 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को न केवल शब्दों में सीमित रखा, बल्कि इसे वास्तविकता में बदल दिया। फाउंडेशन की ओर से अनाथ आश्रमों में भी माल्टा भिजवाया गया ताकि समाज के वंचित वर्ग भी स्थानीय किसानों की मेहनत का लाभ उठा सकें। यह पहल फाउंडेशन की मानवीय सोच और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाती है।
महोत्सव में बड़ी संख्या में किसान, उपभोक्ता, और आम नागरिकों की सहभागिता देखने को मिली। उत्कृष्ट बिक्री और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने सिद्ध कर दिया कि यदि सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो पर्वतीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकते हैं। ट्रस्टी गीता धामी जी के मार्गदर्शन में, यह महोत्सव निश्चित रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए आशा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभरा है।
इस घटना से साफ है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों की पहचान और समर्थन आवश्यक है। देश के विकास में स्थानीय उत्पादों की अहमियत को समझना और बढ़ावा देना आज के समय की आवश्यकता है।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे
गीता राठौर
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