राज्य में अत्याचार के पीड़ितों को न्याय और सहारा देने का विश्वास दिलाया मुख्यमंत्री ने

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए […]

Sep 22, 2026 - 18:27
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राज्य में अत्याचार के पीड़ितों को न्याय और सहारा देने का विश्वास दिलाया मुख्यमंत्री ने
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति ए

राज्य में अत्याचार के पीड़ितों को न्याय और सहारा देने का विश्वास दिलाया मुख्यमंत्री ने

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनिश्चित किया कि अत्याचार से प्रभावित हर व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिले। इसके लिए एक बैठक बुलाई गई थी।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने इस बैठक में कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि समिति की बैठकें केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहें। उन्हें यह देखना होगा कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उनका अधिकार मिले। इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

लंबित मामलों की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों की लंबित विवेचना को लेकर चर्चा की। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर प्रकृति के लंबित मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग को आपसी समन्वय के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

पीड़ितों की राहत एवं सहायता

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि जो मामले राहत संबंधी में विलंबित हैं, उन्हें अतिशीघ्र देखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है। प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए।

विशेष न्यायालयों में मामले

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए। पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है। इसके मद्देनजर, मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए जरुरत अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

जागरूकता और प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार संबंधी नियमित प्रशिक्षण जरुरी है। इसके साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सहकार्य की आवश्यकता है। 

डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर पर प्रभावी निगरानी के लिए एक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए। जिन जिलों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, उन जिलों की अलग से समीक्षा की जाए। 

कार्यवाही की नियमित समीक्षा

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि बैठक में लिए गए निर्णय कार्यवृत्त तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े। 

इस बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी भी उपस्थित थे।

यह बहुत आवश्यक है कि हम सभी मिलकर उन संवेदनाओं और दर्द को दूर करने में सहयोग करें जो अत्याचार का शिकार बने लोगों के दिल में गहरी स्थान बना चुकी हैं।

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो कृपया हमारी वेबसाइट India Twoday पर जाएँ।

सादर,
टीम इंडिया टुडे - प्रिया शर्मा

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