शांतिकुंज के शताब्दी समारोह का भव्य उद्घाटन, सीएम धामी ने कहा— यह युग चेतना का महापर्व है
उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक संस्था शांतिकुंज के शताब्दी समारोह की रविवार को विधिवत शुरुआत हो गई। बैरागी कैंप मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह का शुभारंभ…
शांतिकुंज के शताब्दी समारोह का भव्य उद्घाटन, सीएम धामी ने कहा— यह युग चेतना का महापर्व है
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक संस्था शांतिकुंज का शताब्दी समारोह रविवार को धूमधाम से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भाग लिया।
समारोह का शुभारंभ
शांतिकुंज के शताब्दी समारोह की भव्य शुरुआत बैरागी कैंप मैदान में ध्वज वंदन और अखंड दीपक प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर अनेक अनुयायी और भक्त एकत्रित हुए, जो इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से आए थे। यह समारोह शांतिकुंज की 100 वर्षों की यात्रा का प्रतीक है, जो आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा के लिए समर्पित है।
सीएम धामी का संदेश
इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "यह युग चेतना का महापर्व है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांतिकुंज केवल एक संस्था नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक माध्यम है। सीएम धामी ने कहा, "आज के इस महापर्व पर हम सभी को शांतिकुंज के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।"
देश-विदेश से आए मेहमान
समारोह में देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों भक्तों ने भाग लिया। लोग यहाँ केवल भक्ति के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान और सामुदायिक सौहार्द बढ़ाने के उद्देश्य से भी आए थे। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि लोगों को एकत्रित करने और संस्कृति के संरक्षण का भी कार्य करता है।
समारोह की विशेषताएँ
समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। पूजा-अर्चना के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान को साझा करने के लिए विशेष सेमिनार और कार्यशालाएँ भी आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त, शांतिकुंज द्वारा भावुक साक्षात्कार और विचार विमर्श भी हुआ, जिसमें ज़िंदगी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
शांतिकुंज ने पिछले 100 वर्षों में न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। यहां योग, ध्यान और स्वास्थ सेवाओं का महत्व सिर्फ एक शिक्षाप्रद केंद्र के रूप में न होकर, संपूर्ण मानवता के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में उभरा है।
समापन विचार
शांतिकुंज का शताब्दी समारोह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो आध्यात्मिकता, मानवता और स्वावलंबन का प्रतीक है। यह समारोह हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चे प्रेम और सेवा का मार्ग हमेशा हमें एकीकृत करने का कार्य करता है।
इस तरह के आयोजनों से न केवल धार्मिक भावना को प्रगाढ़ किया जाता है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों में एका की भावना को भी मजबूत बनाते हैं। शांतिकुंज के शताब्दी समारोह से सभी को प्रेरणा मिलती है कि हम कैसे अपने आसपास के समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान कर सकते हैं।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे - स्मिता चोपड़ा
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