प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर विवाद: सुरक्षा कारणों से रथ रोकने पर साधुओं के साथ झड़प

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर माघ मेले के दौरान तनावपूर्ण माहौल बन गया। ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य रथ जुलूस संगम तट तक पहुंचने से पहले ही पुलिस प्रशासन द्वारा रोक दिया गया। प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र को …

Jan 18, 2026 - 18:27
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प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर विवाद: सुरक्षा कारणों से रथ रोकने पर साधुओं के साथ झड़प
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर माघ मेले के दौरान तनावपूर्ण माहौल बन गया। ज्योतिष पी

प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर भव्य रथ जुलूस को रोका गया, साधुओं के साथ हुई धक्का-मुक्की

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कम शब्दों में कहें तो, प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को पुलिस ने रोक दिया, जिससे साधुओं और पुलिस के बीच विवाद उत्पन्न हो गया।

प्रयागराज की पवित्र धरती पर मौनी अमावस्या का पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन संगम में स्नान करने के लिए लाखों की तादाद में श्रद्धालु जुटते हैं। लेकिन इस बार, माघ मेले के दौरान तनावपूर्ण स्थिति ने इस पावन अवसर को वाद-विवाद का विषय बना दिया। ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य रथ जुलूस संगम तट तक जाने से पहले ही पुलिस प्रशासन द्वारा रोक दिया गया।

सुरक्षा कारणों से रथ रोका गया

प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित किया था। इसी कारण से शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल संगम तट तक जाने का अनुरोध किया गया। लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रथ से उतरने से इंकार कर दिया और इस पर अड़े रहे कि उन्हें रथ के माध्यम से ही आगे बढ़ने दिया जाए।

साधुओं और पुलिस के बीच झड़प

इस विरोध के बाद, शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में धक्का-मुक्की में बदल गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ में शिष्यों के साथ मारपीट के भी आरोप लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि माहौल तनावपूर्ण बन गया और लोग अफरा-तफरी में दौड़ने लगे।

शंकराचार्य का आरोप और निर्णय

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा, “बड़े-बड़े अधिकारी संतों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।” इस घटना से नाराज होकर उन्होंने मौनी अमावस्या का पवित्र स्नान करने का निर्णय किया और जुलूस वापस लौटा लिया।

प्रशासन की बेहतर तैयारी

हालांकि, पुलिस कमिश्नर सहित वरिष्ठ अधिकारी शंकराचार्य को मनाने में जुटे रहे, लेकिन उन्हें मानाने में सफलता नहीं मिली। प्रशासन ने Mela क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन के लिए AI, CCTV, ड्रोन और सुरक्षा इंतजाम किए थे। मौनी अमावस्या विशेष तिथि के रूप में माघ मेले में विख्यात है, जहाँ करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगाने आते हैं। लेकिन इस घटना ने विवाद को जन्म दे दिया, जिससे प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

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Team India Twoday - महिमा रानी

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