सीएम धामी: उत्तराखंड के लोक पर्वों को प्रोत्साहन देने वाले सांस्कृतिक पुनरुत्थान के नायक
उत्तराखंड के लोक पर्व ‘इगास-बूढ़ी दिवाली’ के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अपने आवास पर परंपरागत उल्लास के साथ ये पर्व मनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कैबिनेट मंत्री, विधायक और लोक कलाकार शामिल हुए। सांस्कृतिक पुनरुत्थान के केंद्र बने सीएम धामी मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने […] The post सांस्कृतिक पुनरुत्थान के केंद्र बने सीएम धामी, राज्य के लोकपर्वों को लगातार कर रहे हैं प्रोत्साहित first appeared on Vision 2020 News.
सीएम धामी: उत्तराखंड के लोक पर्वों को प्रोत्साहन देने वाले सांस्कृतिक पुनरुत्थान के नायक
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के लोक पर्व 'इगास-बूढ़ी दिवाली' के माध्यम से उत्तराखंड के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके प्रयासों से न केवल समृद्धि, बल्कि राज्य की लोक संस्कृति को भी नया जीवन मिल रहा है।
उत्तराखंड के लोक पर्व 'इगास-बूढ़ी दिवाली' के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर पारंपरिक उल्लास के साथ यह पर्व मनाया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कैबिनेट मंत्री, विधायक और लोक कलाकार शामिल हुए।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान के केंद्र बने सीएम धामी
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस लोक पर्व पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है, जो उत्तराखंड की संस्कृति को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय मुख्यमंत्री धामी की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरी आस्था और समर्पण को दर्शाता है।
इस उत्सव के दौरान पारंपरिक नृत्य और गीतों ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। मुख्यमंत्री धामी ने उपस्थित कलाकारों और जनता के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं तथा कहा कि—
“उत्तराखंड की संस्कृति हमारी अस्मिता की पहचान है। इस परंपरा को जीवित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।” यह शब्द उनकी सांस्कृतिक जागरूकता और समर्पण को उजागर करते हैं।
रुद्रप्रयाग में आपदा प्रभावित परिवारों से की मुलाकात
इगास पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने रुद्रप्रयाग जाकर आपदा प्रभावित परिवारों से भेंट की। उन्होंने परिवारों का हालचाल लिया और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों को फल व उपहार भेंट किए और उनके साथ भोजन भी किया। उन्होंने कहा—
“मैं आपके बीच केवल मुख्यसेवक के रूप में नहीं बल्कि एक पुत्र और भाई की तरह सदैव उपस्थित हूं। आपका दुख मेरा अपना दुख है, और आपके जीवन में मुस्कान लाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा ध्येय है।”
जनता से मिला स्नेह वो मेरी पूंजी
सीएम ने आगे कहा, “राज्य की सेवा करते हुए जनता से जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिलता है, वही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और प्रेरणा है।”
मुख्यमंत्री धामी का यह आयोजन सांस्कृतिक पर्व का उत्सव और साथ ही आपदा प्रभावितों का समर्थन दोनों को दर्शाता है। यह उनके संवेदनशीलता और जनसंपर्क के प्रति वचनबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी पहल न केवल उत्तराखंड की लोक परंपराओं को सम्मान करती है, बल्कि यह बताती है कि सरकार विकास के साथ-साथ संस्कृति, संवेदनशक्ति और समाज के सभी पहलुओं से जुड़ी हुई है।
राज्य सरकार की इन पहलों के पीछे एक दीर्घकालिक संकल्प है—संस्कृति को उजागर करना और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना। मुख्यमंत्री धामी की इस कोशिश से कई लोग प्रेरित हो रहे हैं और राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को फिर से एक नया जीवन मिल रहा है।
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— Team India Twoday, स्वाति शर्मा
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