सीएम धामी की पहल: ST/SC अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को मिलेगा त्वरित न्याय
रैबार डेस्क: मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर... The post पीड़ितों को न्याय में नहीं होगी देरी, ST/SC अत्याचार के लंबित मामलों पर मुख्यमंत्री धामी सख्त appeared first on Uttarakhand Raibar.
सीएम धामी की पहल: ST/SC अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को मिलेगा त्वरित न्याय
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कम शब्दों में कहें तो: मुख्यमंत्री धामी ने पीड़ितों को समय पर न्याय और सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने लंबित मामलों की त्वरित समीक्षा और उचित कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि "अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए।" इस बैठक में, उन्होंने लंबित विवेचनाओं और विशेष न्यायालयों में मौजूद मामलों की प्रभावी और समयबद्ध समीक्षा के लिए निर्देश दिए।
विवेचनाओं की समयबद्ध समीक्षा का निर्देश
सीएम धामी ने 2024 से अब तक लंबित मामलों की समीक्षा का आह्वान करते हुए संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान खोजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर व पुराने मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
राहत राशि का त्वरित भुगतान
बैठक में मुख्यमंत्री ने राहत राशि के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि "जिन मामलों में राहत राशि देने में देरी हुई है, उनकी अलग से समीक्षा की जानी चाहिए।” यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रभावित परिवारों को केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए।
बच्चों की शिक्षा का ध्यान
प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो
उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षिक योजनाओं का लाभ दिलाना महत्वपूर्ण है।
नियंत्रण एवं प्रशिक्षण तंत्र
सीएम ने मामलों की निगरानी के लिए एक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए जिससे विवेचना, न्यायालय की स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की निगरानी की जा सके। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण और अभियोजन विभाग के अधिकारियों को अधिनियम तथा संवेदनशील मामलों की विवेचना को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए।
वर्तमान स्थितियों का अवलोकन
बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के अंतर्गत 189 अभियोग दर्ज हुए, जिसमें 2025 में 157 और 15 सितंबर 2026 तक 116 अभियोग शामिल हैं। साथ ही, वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
यह पहल मुख्यमंत्री धामी के द्वारा न्याय और सुरक्षा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह सुनिश्चित करती है कि सभी पीड़ितों को उनके अधिकार, सुरक्षा और सम्मान दिलाने में बाधाएँ ना आएं।
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सप्रेम,
टीम इंडिया टुडे, नेहा भारती
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