सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: अंशुमान की साइंस स्ट्रीम में पढ़ाई को मिली मंजूरी
देहरादून : देहरादून के प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ स्कूल के प्रबंधन की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने करारा अंकुश लगाते हुए छात्र अंशुमान जायसवाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि छात्र को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में ही पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा में बैठने की अनुमति …
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: अंशुमान की साइंस स्ट्रीम में पढ़ाई को मिली मंजूरी
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कम शब्दों में कहें तो, सुप्रीम कोर्ट ने छात्र अंशुमान जायसवाल को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में अध्ययन जारी रखने की अनुमति दी है।
देहरादून: देहरादून के प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ स्कूल के प्रबंधन की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने एक करारा अंकुश लगाते हुए छात्र अंशुमान जायसवाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि छात्र को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
मामले का विवरण
यह मामला तब शुरू हुआ जब सेंट जोसेफ स्कूल प्रबंधन ने अंशुमान को कक्षा 10 में प्राप्त अंकों के आधार पर विज्ञान संकाय में प्रवेश तो दिया, लेकिन बाद में बोर्ड परीक्षा में निर्धारित न्यूनतम प्रतिशत से कम अंक आने के बहाने उसे कॉमर्स संकाय में भेजने का आदेश दे दिया। छात्र और उसके माता-पिता के बार-बार निवेदनों के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने अंशुमान को कक्षा में बैठने तक से रोक दिया।
कोर्ट में चुनौती
छात्र के पिता, राजकुमार जायसवाल ने इस फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। अंततः उन्होंने अपने बेटे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
23 जनवरी को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद इस महत्वपूर्ण निर्णय को सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि छात्र अंशुमान जायसवाल को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि 11वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर स्कूल प्रबंधन और जिलाधिकारी देहरादून आपसी विचार-विमर्श कर यह तय करें कि अंशुमान को 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा विज्ञान संकाय से देने की अनुमति दी जाए या नहीं। इस फैसले से अंशुमान को अपनी प्रतिभा साबित करने और विज्ञान विषय में आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलेगा।
छात्रों के अधिकारों की जीत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। छात्र के पिता, श्री राजकुमार जायसवाल ने न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला न केवल उनके बेटे के लिए, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए एक मिसाल है, जो स्कूलों की मनमानी का शिकार होते हैं। इस फैसले ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के अधिकारों को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है और इसे उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
अंततः, अंशुमान के इस मामले ने शिक्षा परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण प्रकाश डाला है, जहां छात्रों को अपनी महत्वाकांक्षाओं और करियर के रास्ते में बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इसके अलावा, यह निर्णय अन्य छात्रों और उनके परिवारों को भी सिखाता है कि शिक्षा के अधिकार के लिए न्यायालय का रुख करना एक वैध और आवश्यक उपाय है।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे, स्नेहा शर्मा
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