स्पेशल-वार्ड में भर्ती मरीजों का मुफ्त इलाज बंद:हिमाचल सरकार ने बदली SoP; आउटडोर मरीजों के मुफ्त टेस्ट हो सकते हैं बंद

हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के स्पेशल वार्ड में भर्ती होकर उपचार कराने वाले मरीजों की मुफ्त उपचार की सुविधा बंद कर दी गई है। एक अप्रैल से ऐसे मरीजों को मुफ्त इलाज नहीं दिया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिए है। वहीं सरकारी अस्पतालों में आउटडोर पेशेंट के रोजाना किए जाने वाले मुफ्त टेस्ट भी बंद करने की तैयारी है। हालांकि इसे लेकर अभी फैसला होना बाकी है। बता दें कि मुख्यमंत्री हिमाचल हेल्थ केयर स्कीम (हिमकेयर) और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को 5 लाख रुपए तक कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा है। इसके लिए 8 मार्च 2019 को स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SoP) जारी की गई। नॉर्मल वार्ड में भर्ती मरीजों को मिलती रहेगी मुफ्त इलाज की सुविधा अब इन SoP के क्लॉज-एम को रिमूव कर दिया गया है। इसके बाद अब स्पेशल वार्ड में भर्ती हिमकेयर और AB-PMJAY कार्डधारक को मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा। जो मरीज स्पेशल वार्ड से बाहर सामान्य वार्ड में भर्ती होंगे, उन्हें पहले की तरह मुफ्त उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। प्रदेश में 8.53 लाख कार्डधारक प्रदेश में हिमकेयर योजना के तहत 8.53 लाख कार्डधारक है। इनमें से जो मरीज स्पेशल वार्ड में भर्ती होंगा, उन्हें कैशलेस फ्री ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा। इन दोनों योजनाओं में मरीज का सरकारी अस्पताल में पांच लाख रुपए तक का उपचार मुफ्त होता है। हिमकेयर राज्य की स्कीम है, जबकिAB-PMJAY केंद्र सरकार की योजना है। मगर आयुष्मान में 50-50 फीसदी के अनुपात में केंद्र व राज्य सरकार खर्च उठाती है। हिमकेयर की शत-प्रतिशत बजट राज्य सरकार देती है। आर्थिक संकट को देखते हुए हटाया एम क्लॉज आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार ने यह कदम उठाया है और स्पेशल वार्ड लेकर उपचार कराने वाले साधन संपन्न लोगों के लिए यह सुविधा विड्रा की है। इसी तरह इन दोनों योजनाओं में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज पहले ही बंद किया जा चुका है। यह कदम मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा इन दोनों योजनाओं में सुधार के लिए गठित कमेटी की सिफारिश पर लिए गए हैं। 300 करोड़ से ज्यादा की देनदारी बता दें कि प्रदेश में इस वक्त 354 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारी इन दोनों योजनाओं की हो गई है। राज्य सरकार अस्पतालों को पूरी पेमेंट नहीं दे पा रही है। सरकारी अस्पतालों की 227 करोड़ रुपए और प्राइवेट अस्पतालों की 127 करोड़ रुपए पेमेंट सरकार के पास पेंडिंग है, क्योंकि पूर्व में मुफ्त इलाज की सुविधा प्राइवेट अस्पतालों में भी जारी थी। गड़बड़ियां सामने आने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज बंद किया गया है। निशुल्क टेस्ट बंद करने की तैयारी वहीं सरकारी अस्पतालों में रोजाना आने वाले बाह्य मरीजों (आउटडोर पेशेंट) के निशुल्क टेस्ट सरकार बंद करने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग टेस्ट की दर्रें तय कर रहा है और इसे लेकर अंतिम फैसले के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज रखा है। अस्पताल में दाखिल मरीजों को पहले की तरह निशुल्क टेस्ट की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। यही नहीं पर्ची काटने के भी अब 10 रुपए करने की तैयारी है। यह रोजाना अस्पताल आने वाले हजारों रोगियों के लिए झटका साबित होगा।

Apr 4, 2025 - 07:00
 47  30773
स्पेशल-वार्ड में भर्ती मरीजों का मुफ्त इलाज बंद:हिमाचल सरकार ने बदली SoP; आउटडोर मरीजों के मुफ्त टेस्ट हो सकते हैं बंद
हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के स्पेशल वार्ड में भर्ती होकर उपचार कराने वाले मरीजों की मुफ

स्पेशल-वार्ड में भर्ती मरीजों का मुफ्त इलाज बंद: हिमाचल सरकार ने बदली SoP

हिमाचल प्रदेश की सरकार ने हाल ही में अपने स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए SoP के अनुसार, स्पेशल-वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए मुफ्त इलाज की सेवा बंद कर दी गई है। यह निर्णय सरकार ने अस्पतालों की संपूर्ण कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए लिया है।

क्या है नए SoP का प्रभाव?

नए निर्देशों के लागू होने के बाद, मरीजों को अब उनके उपचार की लागत का वहन स्वयं करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय मरीजों पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके साथ ही, आउटडोर मरीजों के मुफ्त टेस्ट भी बंद किए जा सकते हैं, जो एक और चिंता का विषय है।

सरकार का रुख और प्रतिक्रिया

इस बदलाव पर सरकार का कहना है कि यह कदम स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उठाया गया है। लेकिन अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के खिलाफ एक बड़ा कदम मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले से ही सीमित संसाधनों का सही उपयोग करना चाहिए, बजाय मरीजों की व्यवस्था को और कठिन बनाने के।

आगे की संभावनाएँ

इस निर्णय के बाद, मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद को लेकर कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। अस्पतालों में सुविधाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी, यह देखने वाली बात होगी। अगर आउटडोर मरीजों के टेस्ट भी बंद हो गए, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच में देरी हो सकती है।

स्वास्थ्य योजनाओं के संदर्भ में यह बदलाव विचारणीय है, और सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।

अधिक अपडेट्स के लिए, कृपया indiatwoday.com पर जाएं।

Keywords:

स्पेशल-वार्ड, मरीजों का मुफ्त इलाज बंद, हिमाचल सरकार, SoP बदलाव, आउटडोर मरीज, मुफ्त टेस्ट बंद, स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक बोझ, सरकारी स्वास्थ्य नीति, संसाधनों का उपयोग, स्वास्थ्य समस्याएँ, मरीजों के अधिकार News by indiatwoday.com

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow