उत्तराखंड: कांग्रेस की नई चुनौती, 1320 मेगावाट बिजली सौदे पर विवाद बढ़ा
1320 मेगावाट बिजली खरीद पर कांग्रेस का हमला, पवन खेड़ा ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल। देहरादून। उत्तराखंड में 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार …
उत्तराखंड: कांग्रेस की नई चुनौती, 1320 मेगावाट बिजली सौदे पर विवाद बढ़ा
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड में 1320 मेगावाट बिजली खरीद समझौते को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। पवन खेड़ा ने टेंडर प्रक्रिया में संपन्न बदलावों पर सवाल उठाया है।
देहरादून। उत्तराखंड में 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली के दीर्घकालिक खरीद समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद ने जोर पकड़ लिया है। कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर टेंडर प्रक्रिया में मनमाने बदलाव करने का आरोप लगाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खेड़ा का आरोप है कि 86 में से 84 टेंडर शर्तों में बदलाव किए गए और इस प्रक्रिया का सीधा लाभ अदाणी पावर को मिला। ऐसे में अब सरकार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।
बिजली खरीद का प्रस्ताव
25 अगस्त 2026 को उत्तराखंड कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को अदाणी पावर लिमिटेड से 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीदने की मंजूरी दी थी। सरकार के दावे अनुसार, प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में अदाणी पावर ने सबसे कम बोली लगाई, जिसकी स्वीकृत दर ₹5.746 प्रति यूनिट है।
छत्तीसगढ़ में संयंत्र की स्थापना
यह परियोजना छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक आवंटित होने के बाद संचालित की जाएगी और अदाणी पावर वहां 1320 मेगावाट का संयंत्र स्थापित करेगा। सरकार का यह भी कहना है कि राज्य को वित्त वर्ष 2029-30 से बिजली मिलेगा। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करना और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
THDC-UJVN प्रोजेक्ट पर सवाल
कांग्रेस ने शिकायत की है कि वर्तमान बिजली खरीद व्यवस्था की तुलना पूर्व में प्रस्तावित THDC-UJVN परियोजना से की जा रही है। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पहले प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप टेंडर की शर्तों में बड़े बदलाव किए गए।
टेंडर प्रक्रिया में बदलाव का आरोप
पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि टेंडर में 86 में से 84 शर्तें बदली गईं, जिनमें प्रमुख ये शामिल हैं कि पूरी 1320 मेगावाट की क्षमता एक ही बोलीदाता से लेने, संयंत्र को उत्तराखंड के बाहर स्थापित करने और ट्रांसमिशन लागत को भी शामिल किया गया। कांग्रेस के अनुसार, इन बदलावों ने प्रतिस्पर्धा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया और अंततः अदाणी पावर को विशेष लाभ पहुँचाया।
25 साल का करार: राजनीतिक मुद्दा
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, यूपीसीएल को अदाणी पावर के साथ 25 वर्षों का पावर सप्लाई एग्रीमेंट करने के लिए अधिकृत किया गया है। अदाणी पावर 1320 मेगावाट बिजली की आपूर्ति का दावा कर रहा है, जिसमें अनुबंधित क्षमता 1234 मेगावाट बताई गई है। कांग्रेस ने इस दीर्घकालिक करार पर संभावित वित्तीय बोझ और टेंडर की शर्तों पर संदेह जताया है।
कांग्रेस के द्वारा उठाए गए सवाल
पवन खेड़ा ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि थर्ड-हैंड THDC-UJVN के प्रस्ताव को क्यों नहीं आगे बढ़ाया गया, टेंडर में इतने बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी और संयंत्र को बाहर स्थापित करने की अनुमती क्यों दी गई। इसके साथ ही कांग्रेस यह भी जानना चाहती है कि 25 वर्षों के बिजली खरीद समझौते की वित्तीय और कानूनी शर्तें राज्य के हित में कैसी हैं।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार का कहना है कि अदाणी पावर ने प्रतिस्पर्धी बोली में सबसे कम बोली लगाई थी (L1) और यह कदम राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और बढ़ती मांग के मद्देनजर उठाया गया है। अब विवाद तूल पकड़ रहा है, जिसमें टेंडर की मूल शर्तें, संशोधन और 25 वर्षीय पावर सप्लाई एग्रीमेंट की वित्तीय देनदारी के मुद्दे शामिल हैं।
राजनीतिक हलचल के बीच, उत्तराखंड के इस बिजली सौदे को लेकर आगे की जांच और प्रतिक्रिया का इंतजार है। मुद्दा जटिल है लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है।
अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
संवाददाता: नीति अग्रवाल
टीम इंडिया टुडे
What's Your Reaction?