उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक प्रगति: जीवन प्रत्याशा 73 साल, 6 हजार नए होमस्टे
रैबार डेस्क: 9 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के लिए नियोजन... The post आर्थिक, समाजिक सूचकांकों में उत्तराखंड की लंबी छलांग, जीवन प्रत्याशा बढ़कर 73 साल हुई, 6 हजार से ज्यादा होमस्टे खुले appeared first on Uttarakhand Raibar.
उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक प्रगति: जीवन प्रत्याशा 73 साल, 6 हजार नए होमस्टे
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड ने हाल के वर्षों में अपनी आर्थिक और सामाजिक सूचकांकों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य की जीवन प्रत्याशा बढ़कर 73 साल हो गई है, और 6 हजार से अधिक होमस्टे का उद्घाटन किया गया है।
9 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के लिए नियोजन विभाग ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में हुई प्रगति का विवरण दिया गया है। प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस सर्वेक्षण को साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड की जीएसडीपी (Gross State Domestic Product) में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है।
जीएसडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2024–25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 381,889 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जबकि वर्ष 2021–22 में यह लगभग 254,000 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, तीन वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में डेढ़ गुना वृद्धि दिखाई दी है।
पर प्रति व्यक्ति आय में सुधार
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021–22 में प्रति व्यक्ति आय 194,670 रुपये थी, जबकि 2024–25 में यह बढ़कर 273,921 रुपये हो गई है। यह दर्शाता है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ और नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
छोटे उद्योगों का विस्तार
साल 2024–25 तक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है। जहां 2021–22 में MSME इकाइयाँ 59,798 थीं, वहीं अब ये संख्या 79,394 तक पहुँच गई है। स्टार्टअप क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है, जहां 2017 में संख्या लगभग शून्य थी और अब यह 1,750 तक पहुँच गई है।
ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन 5,157 मिलियन यूनिट से बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है, जबकि सौर ऊर्जा उत्पादन भी 439 मेगावाट से बढ़कर 1,027 मेगावाट तक पहुँच गया है। सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार ने पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की है।
सामाजिक सूचकांकों में सुधार
मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स 9.7% से घटकर 6.92% हो गया है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में भी कमी आयी है। 2022 में आईएमआर 22 थी, जो 2025 में घटकर 20 रह गई। इसी तरह, मातृ मृत्यु दर 103 से घटकर 91 हो गई। इन परिवर्तनों के कारण उत्तराखंड में जीवन प्रत्याशा 71.7 वर्ष से बढ़कर 73 वर्ष हो गई है।
कृषि और पर्यटन का योगदान
कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है, जहां चावल और गेहूं का उत्पादन 28.23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 32.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। 2022 में औषधीय और सुगंधीय पौधों की खेती 900 हेक्टेयर तक सीमित थी, जो 2025 में बढ़कर 10,000 हेक्टेयर हो गई है। दूध का उत्पादन भी 54.59 लाख लीटर हो गया है।
पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि
होटल और होमस्टे की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2022 में होटलों की संख्या 8,225 थी, जो 2025 में बढ़कर 10,509 हो गई। होमस्टे की संख्या भी 3,935 से बढ़कर 6,061 हो गई है, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है। अब चुनौती यह है कि इस विकास को संतुलित और समावेशी बनाया जाए, ताकि पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में इसका लाभ समान रूप से पहुँच सके।
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सादर, टीम इंडिया ट्वोडे (नीति सिंह)
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