प्रयागराज हाईकोर्ट से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
रैबार डेस्क: बटुकों के यौन शोषण के आरोपों पर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद... The post शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अदालत ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक appeared first on Uttarakhand Raibar.
प्रयागराज हाईकोर्ट से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
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कम शब्दों में कहें तो, प्रयागराज हाईकोर्ट ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, जिसके फलस्वरूप उनके अनुयायी खुशी मना रहे हैं।
राज्य के बटुकों के यौन शोषण के आरोपों के बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामला सुरक्षित रख लिया है। शंकराचार्य पर पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। वाराणसी स्थित मठ में उनके अनुयायियों ने जैसे ही यह खबर सुनी, वहां खुशी का माहौल बन गया।
शंकराचार्य का बयान
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की गई थी। उन्होंने कहा, "सांच को आंच नहीं होती, झूठ की ताकत होती है, लेकिन सच की उससे ज्यादा होती है।" उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति उन पर झूठा आरोप लगा रहा है, वह स्वयं एक हिस्ट्रीशीटर है। आशुतोष ब्रह्मचारी, जिन्होंने आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई में उठे सवाल
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। वहीं, शंकराचार्य के वकील डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने तर्क दिया कि दायर किया गया मुकदमा संरक्षक के जरिए किया गया है और पीड़ित के माता-पिता का कोई ठिकाना नहीं है। सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत की याचिका का उठाना असाधारण नहीं है।
घटनाओं का क्रम
शंकराचार्य के वकील ने बताया कि शुरुआत में 18 जनवरी को अमावस्या के दिन उनके खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया गया था, लेकिन जब केस दर्ज नहीं हुआ, तब पॉक्सो एक्ट के तहत दूसरी याचिका प्रस्तुत की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला साजिश के तहत दर्ज किया गया है।
उन्होंने जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पेश किए गए बच्चों की मार्कशीट हरदोई की है, और वे वहां के संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद का मामला मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था, और बटुकों का मेडिकल जांच लगभग एक महीने बाद किया गया था।
क्या था पूरा मामला?
ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने पुलिस को निष्पक्ष जांच का आदेश दिया है और पीड़ितों की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ विवाद
इस साल 18 जनवरी को माघ मेले में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हो गया था। स्नान के लिए जाते समय, प्रशासन ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद आरोप है कि पुलिस ने बटुकों को पीटा और शंकराचार्य का अपमान किया। इस विरोध के बाद शंकराचार्य ने 11 दिन तक धरना दिया। उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की थी, लेकिन जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तब उन्होंने माघ मेला छोड़कर काशी की ओर प्रस्थान किया।
इस मामले ने धार्मिक और कानूनी जगत में हलचल पैदा कर दी है, और यह निर्णय आने वाले समय में बड़ी चर्चा का विषय बनेगा।
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सच के इर्द-गिर्द घूमती घटनाएँ हमेशा ध्यान आकर्षित करती हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह मामला भी कई सवाल खड़े कर रहा है। समय आने पर अदालत में सभी तथ्यों को सामने लाने की उम्मीद है।
सादर
Team India Twoday, साक्षी शर्मा
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