उत्तराखंड: जयकारों के बीच श्री झंडे जी का सफलता पूर्वक आरोहण, दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का मिला सौभाग्य
देहरादून: प्रेम, सद्भाव और आस्था के प्रतीक ऐतिहासिक झंडे जी का रविवार को श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में विधि-विधान के साथ आरोहण किया गया। पुराने झंडे जी को उतारने, पूजा-अर्चना और गिलाफ चढ़ाने की दिनभर चली धार्मिक प्रक्रिया के बाद दरबार साहिब के सज्जादाशीन महंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में 94 फीट …
उत्तराखंड: जयकारों के बीच श्री झंडे जी का सफलता पूर्वक आरोहण
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में रविवार को ऐतिहासिक झंडे जी का विधिविधान से आरोहण किया गया। लाखों श्रद्धालुओं ने इस पुण्य अवसर का अनुभव किया। इस साल देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
देहरादून: प्रेम, सद्भाव और आस्था के प्रतीक ऐतिहासिक झंडे जी का रविवार को श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में विधि-विधान के साथ आरोहण किया गया। पुराने झंडे जी को उतारने, पूजा-अर्चना और गिलाफ चढ़ाने की दिनभर चली धार्मिक प्रक्रिया के बाद दरबार साहिब के सज्जादाशीन महंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में 94 फीट ऊंचे नए झंडे जी का विधिवत आरोहण कराया गया।
आरोहण की प्रक्रिया और श्रद्धालुओं की भागीदारी
सुबह लगभग सात बजे विशेष पूजा के बाद पुराने झंडे जी को उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद नए झंडे जी को दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराया गया। सुबह 10 बजे से सादे गिलाफ चढ़ाने की रस्म शुरू हुई, जबकि दोपहर एक बजे दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया। इस दौरान महंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को आशीर्वाद दिया और पारंपरिक विधि के अनुसार झंडे जी का आरोहण कराया।
ऐतिहासिक झंडे जी मेला
परंपरा के अनुसार होली के पांचवें दिन चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को दरबार साहिब में झंडे जी के आरोहण के साथ ऐतिहासिक झंडे जी मेला का शुभारंभ हो जाता है। इस वर्ष मेला 27 मार्च को रामनवमी तक चलेगा। मेले के धार्मिक आयोजन 25 फरवरी से ही शुरू हो चुके हैं, जबकि 28 फरवरी से उत्तराखंड के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और विदेशों से संगतों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
श्रद्धालुओं की आस्था
दरबार साहिब में श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अवसर का इंतजार करते हैं और मेले में शामिल होने के लिए देहरादून पहुंचते हैं। 10 मार्च को सुबह 7:30 बजे दरबार साहिब से नगर परिक्रमा भी निकाली जाएगी।
गुरु राम राय की विरासत
बताया जाता है कि गुरु राम राय महाराज, सिखों के सातवें गुरु गुरु हर राय के बड़े पुत्र थे। उनका जन्म वर्ष 1646 में पंजाब के होशियारपुर जिले के किरतपुर में हुआ था। बाद में उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया और यहां दरबार साहिब की स्थापना की। लोक कल्याण और आस्था के संदेश के साथ उन्होंने एक विशाल ध्वजदंड स्थापित किया, जिससे श्रद्धालु झंडे जी के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गिलाफ चढ़ाने का अनोखा अवसर
इस वर्ष देहरादून के पार्क रोड निवासी व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार ने दर्शनी गिलाफ चढ़ाया। गोयल पीपल मंडी में ‘पीतांबर दास एंड संस’ के नाम से फुटकर और थोक व्यापार करते हैं। मेले में पहुंचे बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं का कहना है कि वे हर वर्ष यहां आते हैं और गुरु महाराज के आशीर्वाद से उनके परिवारों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इस पूजा और आरोहण की पूरी प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास आज भी अटूट है। देश-विदेश से आए लाखों भक्तों ने इस पवित्र अवसर को देखने का सौभाग्य प्राप्त किया।
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सादर, कविता शर्मा
टीम इंडिया टुडे
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