उत्तराखंड भूकंप जोन-6 में शामिल, भवन निर्माण नियमों में होगा बड़ा बदलाव

देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार पूरे राज्य के भूकंप जोन छह में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया […] The post भूकंप जोन-6 में शामिल उत्तराखंड, बिल्डिंग बायलाॅज में होगा बड़ा बदलाव first appeared on Vision 2020 News.

Feb 26, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड भूकंप जोन-6 में शामिल, भवन निर्माण नियमों में होगा बड़ा बदलाव
देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन

उत्तराखंड भूकंप जोन-6 में शामिल, भवन निर्माण नियमों में होगा बड़ा बदलाव

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य की भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भवन निर्माण नियमों में बड़े बदलाव का निर्णय लिया है।

देहरादून: उत्तराखंड राज्य के बढ़ते भूकंपीय संवेदनशीलता को देखती हुई राज्य सरकार ने भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में पूरा राज्य भूकंप जोन-6 में शामिल किया गया है, जिसे ध्यान में रखते हुए अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति गठित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार के नेतृत्व में कार्य करेगी। समिति में विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिनमें सीबीआरआई, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, लोक निर्माण विभाग, तथा अन्य शामिल हैं।

वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा और संशोधन

समिति का मुख्य कार्य उत्तराखंड के मौजूदा बिल्डिंग बायलाॅज का गहन अध्ययन करना है। समिति का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि भवन निर्माण के नियम भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुसार हों।

भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य भवन निर्माण के नियमों को अधिक प्रभावी और आपदा-रोधी बनाना है। इसके तहत नई सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संशोधित नियमों से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, और आपदा के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ नियमों में बदलाव करना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना भी आवश्यक है। संशोधित नियमों में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को शामिल किया जाएगा।

नई बिल्डिंग बायलाॅज का निर्माण

नए बिल्डिंग बायलाॅज का लक्ष्य भवनों की संरचनात्मक मजबूती को बढ़ाना और जन-धन के नुकसान को कम करना है। समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग संशोधन व कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

भूकंप सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन

समिति के कार्यक्षेत्र में भूकंप सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान देना होगा। पारंपरिक निर्माण तकनीकों को आधुनिक नियमों के अनुसार लाना और जलवायु अनुकूल विकास सुनिश्चित करना समिति की प्राथमिकता होगी।

संपूर्ण प्रक्रिया में विभिन्न विशेषज्ञों का योगदान शामिल होगा, जिसमें भूकंप विशेषज्ञ और भू-भौतिक विज्ञानी शामिल हैं। इससे राज्य में सुरक्षित और टिकाऊ भवनों का निर्माण संभव हो सकेगा।

भविष्य में इन नए नियमों के कार्यान्वयन से उत्तराखंड राज्य में आपदा प्रबंधन और भवन निर्माण की संस्कृति में एक नई दिशा मिलेगी।

इस प्रकार, उत्तराखंड में भूकंप जोन-6 में शामिल होने के साथ ही भवन निर्माण के नियमों में आवश्यक परिवर्तन लाने का कदम उठाया गया है, जिससे राज्य में सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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टीम इंडिया टुडे, सुमिता शर्मा

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