उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार की अनिश्चितता: क्या है असली वजह?
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तो अब आम हो चली हैं बीते दो सालों में कई बार मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं हुईं तो सही लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार ना हो सका। दिवाली पर इस बात की चर्चाएं थी कि कई नेताओं को मंत्रिमंडल विस्तार का तोहफा मिल सकता है। दिवाली के बाद होली भी चली गई लेकिन ना […] The post खत्म नहीं हुआ इंतजार… उत्तराखंड में क्यों नहीं हो रहा मंत्रंमंडल विस्तार ? first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार की अनिश्चितता: क्या है असली वजह?
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं अब आम हो चुकी हैं, लेकिन इसे लागू करना अभी भी बाकी है। दिवाली और होली जैसे खास अवसरों पर भी किसी प्रकार का विस्तार हुआ नहीं है, जिससे सत्ता के गलियारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
बीते दो सालों में कई बार मंत्रिमंडल विस्तार की बातें उठी हैं लेकिन वह सिर्फ चर्चाओं तक सीमित रहीं। विशेषकर, दिवाली पर यह चर्चा थी कि कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। दिवाली तो बीत गई, फिर होली भी चली गई, लेकिन उतनी महत्वपूर्ण इस प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई।
मंत्रिमंडल विस्तार का सस्पेंस खत्म क्यों नहीं हो रहा?
हालांकि, यह चर्चा की जा रही थी कि आवश्यक सूचियां तैयार हो चुकी हैं और किसी भी समय इन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। कुछ कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस से बीजेपी में आए कुछ नेताओं को इस सूची में जगह मिल सकती है। किंतु, जमीनी हकीकत यह है कि यह सब कुछ ठंडी हवा की तरह है, जो कभी भी ठोस रूप नहीं ले पाई।
भाजपा सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी
हालिया घटनाक्रम के पश्चात, उत्तराखंड की राजनीति में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार और संगठन पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल का अभाव है, जिससे विधायकों में असंतोष उत्पन्न हो रहा है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार एक लगातार टलता हुआ मुद्दा बना हुआ है।
यशपाल आर्य का जोरदार हमला
यशपाल आर्य ने कहा है कि भाजपा सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के भीतर भी कई विधायकों की नाराजगी सामने आ रही है जो चिंता का विषय है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर सब कुछ सामान्य होता तो मंत्रिमंडल विस्तार में इतनी देरी नहीं होती। इतना ही नहीं, इससे पहले भी हरीश रावत और हरक सिंह रावत जैसे दिग्गज नेताओं ने भी इस विषय पर अपनी चुटकी ली थी।
राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि यदि वीणाओं को नकारा गया तो आने वाले समय में भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखंड भाजपा का नेतृत्व इस बार कुछ विशेष निर्णय लेने को लेकर हिचकिचा रहा है।
इन सब बातों से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड की राजनीति में वर्तमान स्थिति अनिश्चितता में है। अब देखना यह है कि भाजपा leadership किस प्रकार इस मसले को सुलझाती है।
अधिक जानकारी के लिए, देखें India Twoday.
सादर, सुवर्णा शर्मा टीम इंडिया टुडे
What's Your Reaction?