उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों के TET-2 विवाद पर न्यायिक मार्गदर्शन की आवश्यकता

शिक्षक संगठनों का तर्क—सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या स्पष्ट हो, एलटी संवर्ग पर सीधे लागू करना उचित नहीं. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देशों की समीक्षा और सेवा नियमों में स्पष्टता की मांग. देहरादून। उत्तराखंड में सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग के शिक्षकों के लिए TET-2 की अनिवार्यता को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया …

Sep 23, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों के TET-2 विवाद पर न्यायिक मार्गदर्शन की आवश्यकता
शिक्षक संगठनों का तर्क—सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या स्पष्ट हो, एलटी संवर्ग पर सीधे लागू करन

उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों के TET-2 विवाद पर न्यायिक मार्गदर्शन की आवश्यकता

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग के शिक्षकों के लिए TET-2 की अनिवार्यता पर विवाद गहरा गया है। शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था को लेकर विधिक समीक्षा की मांग की है।

देहरादून। उत्तराखंड में सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग के शिक्षकों के लिए TET-2 की अनिवार्यता को लेकर विवाद फिर से उभर आया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों की विधिक एवं संवैधानिक समीक्षा आवश्यक है। उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा संदर्भ देना उचित नहीं है और इसकी विषय-वस्तु तथा संबंधित सेवा संरचना की स्पष्टता जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या पर सवाल

शिक्षक संगठनों का मानना है कि TET की अनिवार्यता लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रति और उसमें शामिल प्रावधानों का परीक्षण किया जाना चाहिए। Devesh Sharma v. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की योग्यता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की थी। संगठन यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि क्या इन निर्देशों को एलटी शिक्षकों पर सीधे लागू करना सही है।

शिक्षक संघ की मांगें

एससीईआरटी उत्तराखंड के अध्यक्ष विनय थपलियाल का कहना है कि सरकार क्यों नहीं सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान आदेशों की प्रमाणित प्रति और उनके लागू होने वाले पैरा को स्पष्ट करती है। उन्हें विश्वास है कि यदि किसी भी नए आदेश के माध्यम से हमारे शिक्षकों के लिए कोई स्पष्ट निर्देश हैं, तो वे साझा की जानी चाहिए। यदि नियमों में किसी प्रकार का संशोधन करना है, तो सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।

प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा की भिन्नताएँ

शिक्षक संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए अलग-अलग प्रशासनिक एवं सेवा ढांचे हैं। एलटी शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत होती है, और उनका मूल दायित्व मुख्य रूप से माध्यमिक स्तर की कक्षाओं से जुड़ा होता है।

TET विवाद और पदोन्नति पर प्रभाव

इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू एलटी शिक्षकों की पदोन्नति भी है। यदि संबंधित सेवा नियमों में TET को अनिवार्य योग्यता के रूप में नहीं रखा गया है, तो TET की अनिवार्यता लागू करने पर दोबारा विचार होना चाहिए। जुलाई-अगस्त 2026 में इस मुद्दे पर मंत्रालय और शिक्षक संगठनों के बीच मतभेद उभरने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के उदाहरण का हवाला

शिक्षक संघों ने उत्तर प्रदेश के मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां स्पष्ट रूप से एलटी शिक्षकों की नियुक्ति और उनके शिक्षण स्तर को कक्षा 9 और 10 के संदर्भ में संशोधित किया गया है। ऐसे में उत्तराखंड में भी एलटी शिक्षकों की वास्तविक भूमिका को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

सरकार की ओर से स्पष्टता की मांग

शिक्षक संगठनों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टता बनाने की मांग की है:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करवाई जाए।
  • उत्तराखंड के एलटी सेवा नियमों का विधिक परीक्षण किया जाए।
  • भिन्न-भिन्न कैडरों के सेवा नियमों का ध्यान रखा जाए।
  • कक्षा 6 से 8 में अध्यापन की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए।
  • पदोन्नति पर लागू नियमों की समीक्षा की जाए।
  • आवश्यकता पड़ने पर विधि विभाग से राय ली जाए।

अंतिम निर्णय लेने से पहले विधिक समीक्षा आवश्यक

विनय थपलियाल का कहना है कि TET की अनिवार्यता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले न्यायिक आदेशों का समग्र परीक्षण आवश्यक है। उन्हें डर है कि बिना स्पष्टता के, यह विवाद और जटिल हो सकता है।

इस बीच, विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भी जुलाई 2026 में एलटी से प्रवक्ता पदोन्नति में TET की अनिवार्यता के मुद्दे पर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। अब शिक्षक संगठनों की नजर विधिक समीक्षा और आगे के निर्णय पर है।

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टीम इंडिया टूडे, राधिका सिंगल

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