उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम का आगाज़, केदारताल और सरस्वती ताल का जल्द होगा सर्वे
रैबार डेस्क: नेपाल तिब्बत सीमा पर विनाशकारी आपदा से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने... The post उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, जल्द होगा केदारताल, सरस्वती ताल का सर्वे appeared first on Uttarakhand Raibar.
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम का आगाज़
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने ग्लेशियर झीलों के खतरे से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हाल में हुई विनाशकारी आपदा से सबक लेते हुए, उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा और निगरानी के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण उठान किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लेशियर झीलों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है, जिसके अंतर्गत झीलों का समग्र सर्वेक्षण किया जाएगा।
ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण और संभावित खतरों की पहचान
मुख्यमंत्री धामी ने आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को निर्देशित किया है कि राज्य की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का विस्तार से सर्वेक्षण किया जाए। इसमें झीलों के जल स्तर, आकार में बदलाव, आस-पड़ोस के भूभाग की स्थिति, और संभावित जोखिम क्षेत्रों की जानकारी ली जाएगी।
इस प्रस्तावित प्रणाली में आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापने के उपकरण, और संचार तकनीकों का उपयोग किया जाएगा ताकि खतरे की स्थिति में तत्काल चेतावनी दी जा सके। मुख्यमंत्री ने बताया है कि यह प्रयास केवल अर्ली वार्निंग सिस्टम तक नहीं सीमित रहेगा बल्कि इसे और मजबूत करने के लिए सुरक्षा उपाय भी अपनाए जाएंगे।
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और सुरक्षा उपाय
यूजी विभाग बैठक में ग्लेशियर झीलों के साथ-साथ नदियों के जल स्तर, संवेदनशील स्थलों की निगरानी, और आपदा प्रबंधन प्रनाली की सम्पूर्ण समीक्षा की गई। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अपने जनपदों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी नियमित रूप से सुनिश्चित करें।
आपदा प्रबंधन सचिव सुमन के अनुसार, उत्तराखंड में चिंता का विषय बनी हुई कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें से चार का सर्वेक्षण हो चुका है, जबकि शेष झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शीघ्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि चमोली जनपद की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जनपद के केदारताल का सर्वेक्षण जल्द ही एक विशेषज्ञ दल द्वारा किया जाएगा।
ग्लेशियर झीलों की निगरानी प्रणाली और भविष्य की तैयारी
ग्लेशियर झीलों के जोखिमों के प्रबंधन के लिए, ऐसी व्यवस्थाओं को विकसित किया जा रहा है जो संकट की स्थिति में चेतावनी से राहत और बचाव तक की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित कर सके। इस प्रणाली में आधुनिक सेंसर और अर्ली वार्निंग उपकरणों की स्थापना, वास्तविक समय में डेटा एकत्रित करने की व्यवस्था, और चेतावनी के लिए वैकल्पिक संचार माध्यम विकसित करना शामिल है।
सुमन ने आगे बताया कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों को मजबूत करनाबढ़ाया जाएगा ताकि संभावित खतरे की स्थिति में समय पर कार्रवाई की जा सके।
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय न केवल ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि लोगों के जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देगा। इसके माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलेगी।
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सादर, टीम इंडिया टुडे (सीमा शर्मा)
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