उत्तराखंड सूचना आयोग ने सहायक नगर आयुक्त पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया, विभागीय कार्रवाई की संस्तुति
देहरादून/कोटद्वार: उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध न कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम कण्वनगरी, कोटद्वार के सहायक नगर आयुक्त एवं लोक सूचना अधिकारी चन्द्रशेखर शर्मा पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। आयोग ने साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की …
उत्तराखंड सूचना आयोग की तत्परता: सहायक नगर आयुक्त को ₹10,000 का जुर्माना
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड सूचना आयोग ने सूचना न देने के मामले में सहायक नगर आयुक्त चन्द्रशेखर शर्मा पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।
देहरादून/कोटद्वार: उत्तराखंड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी उपलब्ध न कराने के लिए नगर निगम कण्वनगरी, कोटद्वार के सहायक नगर आयुक्त एवं लोक सूचना अधिकारी चन्द्रशेखर शर्मा पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही आयोग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की है।
आयोग का सख्त निर्देश
यह आदेश मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में शिकायत संख्या 16648/2025-26 की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। शिकायतकर्ता अंशुल चन्द्र बुडाकोटी ने आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी ओर से मांगी गई सूचना समय पर और पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई।
क्या है मामला?
बुडाकोटी ने नगर निगम कोटद्वार से एक मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित औपचारिकता की जानकारी मांगी थी। उन्होंने बताया कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें स्पष्ट सूचना नहीं दी गई, और यहां तक कि आयोग के पूर्व आदेश (16 अक्टूबर 2025) का पालन भी अधूरा था।
सूचना आयोग की कड़ी कार्रवाई
आयोग ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना देने में गंभीर लापरवाही बरती गई है। आयोग ने पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन जब संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तब ₹10,000 का दंड लगाया गया। आयोग ने इस निर्णय में कहा कि RTI अधिनियम के प्रति इस प्रकार की उदासीनता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जिलाधिकारी को दिए गए निर्देश
आयोग ने जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को भी स्थिति पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता के आरोपों का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया जाए, और यदि अनियमितता पाई जाती है तो उचित कार्रवाई की जाए।
जुर्माना वसूली की प्रक्रिया
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं किया गया, तो यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन/देयकों से काटकर राजकोष में जमा की जाएगी। जुर्माने की राशि राज्य सरकार के ई-चालान पोर्टल के माध्यम से 'Right to Information Act 2005' के अंतर्गत जमा करनी होगी।
संक्षेप में
इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति गंभीर है और यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं। यह कदम न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
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सादर, टीम इंडिया टुडे (साक्षी शर्मा)
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