किशाऊ परियोजना: आठ दशकों की इंतजार के बाद 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। लगभग आठ दशकों […] The post 8 दशक पुराना इंतजार खत्म! किशाऊ परियोजना पर 6 राज्यों का बड़ा समझौता first appeared on Vision 2020 News.
किशाऊ परियोजना: आठ दशकों की इंतजार के बाद 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें वर्षों से लम्बित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल तथा यमुना के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम है।
समझौते का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह दिन केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को वास्तविकता में बदलने की दिशा में बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की तरफ से भारत सरकार तथा सभी सहभागी राज्य सरकारों का धन्यवाद दिया।
तीन पीढ़ियों का सपना
किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टलती रही। आज, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, वर्षों से लम्बित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति दी जा रही है।
समस्या समाधान की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 की बैठक ने किशाऊ परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों का समाधान प्रस्तुत किया। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निरंतर समन्वय ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसका प्रमाण आज हस्ताक्षरित MoU है।
जल सुरक्षा का नया युग
मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक सामान्य बांध नहीं है, बल्कि यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी एक राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है। इस परियोजना से लगभग 1562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा और 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इसका लाभ उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के नागरिकों को मिलेगा।
सहकारी संघवाद की मिसाल
मुख्यमंत्री ने बताया कि किशाऊ परियोजना केवल एक राज्य या क्षेत्र की परियोजना नहीं है। यह अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों तथा सहभागी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के कारण यह परियोजना अब निर्णायक गति प्राप्त कर चुकी है।
समयबद्ध क्रियान्वयन की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने में सफल होंगे।
कम शब्दों में कहें तो, किशाऊ परियोजना का समझौता पिछले 80 वर्षों के इंतजार का आखिरी पड़ाव है, जो जल सुरक्षा और सहकारी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में, यह परियोजना अनेक राज्यों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
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