देहरादून में 14 दिनों में 4 हत्याएँ: कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
देहरादून : राजधानी देहरादून में बुधवार को एक युवक की भरेबाजार गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये हत्या शहर के बीचोबीच और सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके में की गई। तिब्बती मार्केट में टेनिस खेलकर वापस लौट रहे युवक को बदमाशों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। लेकिन ये इकलौती ऐसी घटना नहीं […] The post 14 दिनों में 4 हत्याओं से दहला दून, कानून व्यवस्था को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल first appeared on Vision 2020 News.
देहरादून में 14 दिनों में 4 हत्याएँ: कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में हाल ही में घटित चार हत्याओं ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
भोपाल: देहरादून में बुधवार को एक युवक की हत्या ने शहर को हिलाकर रख दिया। यह घटना तिब्बती मार्केट के भरे बाजार में हुई, जहाँ युवक टेनिस खेलकर लौट रहा था। बदमाशों ने उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। यह कोई इकलौती घटना नहीं है, क्योंकि पिछले 14 दिनों में चौथी बार हत्या की गई है।
हालिया हत्याओं की श्रृंखला
महज 14 दिनों में चार हत्याएँ हो चुकी हैं। 29 जनवरी को विकासनगर क्षेत्र में एक छात्रा की हत्या हुई। उसका शव अगले दिन ही घर से कुछ दूरी पर झाड़ियों में पाया गया। इस घटना के दो दिन बाद, 31 जनवरी को ऋषिकेश में महिला की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर ने कर दी। इसके अगले ही दिन, 2 फरवरी को दूल्हा बाजार में गुंजन हत्याकांड ने सनसनी फैलाई। इस श्रृंखला का चौथा मामला बुधवार को सामने आया, जब एक कारोबारी को दिनदहाड़े गोली मारी गई।
देहरादून में कानून व्यवस्था की खस्ताहाली
इन हत्याओं ने देहरादून की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पुलिस की नाकामी उजागर होती है, जब इतने बड़े शहर में इस तरह की हत्याएँ हो रही हों। गुंजन हत्याकांड हुआ, जो कोतवाली के पास ही था, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इस तरह की घटनाओं ने खाकी को दागदार किया है।
बदमाशों के हौसले बुलंद
तिब्बती मार्केट में हुए अर्जुन हत्याकांड के बाद, आरोपियों को पकड़ने में पुलिस को 24 घंटे लग गए। लेकिन ये समझ से परे है कि शहर के बीचोबीच हत्या की घटना घटित होने के बाद बदमाश कैसे इतने दूर भाग निकले। क्या बदमाशों में पुलिस का कोई भय नहीं रह गया है? ये सवाल अब आम जनता के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी है।
इन घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। देहरादून की जनता अब इस पर सवाल उठा रही है कि आखिरकार पुलिस क्या कर रही है? क्या कानून का राज केवल नाम का रह गया है?
इन भयावह घटनाओं ने सुरक्षा बलों की तत्परता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिस को चाहिए कि वह इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है, और जब वह अपने कर्तव्यों में असफल होती है, तो इसका प्रभाव सीधे जनता पर पड़ता है।
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उम्मीद है, कि इन घटनाओं के प्रकाश में पुलिस आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
– टीम इंडिया ट्वोडे (नेहा शर्मा)
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