मुख्यमंत्री का जोर: हर्बल और जड़ी-बूटी क्षेत्र में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित करें

हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में क्लस्टर बनाकर हर्बल क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में […] The post हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री first appeared on Vision 2020 News.

Dec 5, 2025 - 18:27
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मुख्यमंत्री का जोर: हर्बल और जड़ी-बूटी क्षेत्र में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित करें
हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री देहरा

मुख्यमंत्री का जोर: हर्बल और जड़ी-बूटी क्षेत्र में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित करें

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कम शब्दों में कहें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में हर्बल क्षेत्र में नवाचार और बाजार संभावनाओं को बढ़ाने की बात की है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र न केवल किसानों को आर्थिक लाभ दिला सकता है, बल्कि स्वरोजगार के लिए भी अवसर प्रदान कर सकता है।

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में हर्बल क्षेत्र के लिए क्लस्टर बनाकर व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद हर्बल और औषधीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

नवाचार और अनुसंधान पर जोर

मुख्यमंत्री ने जड़ी-बूटी और एरोमा सेक्टर में अग्रणी राज्यों की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजने का भी निर्देश दिया। इससे उत्तराखंड में नवीनतम नवाचारों को लागू किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जड़ी-बूटी क्षेत्र के टर्नओवर को बढ़ाने के लिए अनुसंधान, नवाचार, उत्पादन, विपणन और ब्रांडिंग की दिशा में समन्वित कार्य की आवश्यकता है।

हर्बल इकोनॉमी का विकास

धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की अपनी प्राकृतिक हर्बल संपदा की अपार संभावनाओं को देखते हुए, सरकार ने इसे विकसित करने की योजना बनाई है। किसानों को उनके उत्पाद का अधिकतम लाभ दिलाने, स्थानीय स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग से हर्बल उत्पादों की वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाना चाहिए।

सुरक्षा उपायों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि जिन क्षेत्रों में भालू और अन्य जंगली जीवों के कारण जनजीवन और फसलों को खतरा है, उन क्षेत्रों में कृषि और वन विभागों की संयुक्त टीमें भेजी जानी चाहिए। ये टीमें लोगों को सुरक्षा और फसल संरक्षण के उपायों के बारे में जानकारी देंगी।

संस्थान की भूमिका और उपस्थिति

बैठक में जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने अनुसंधान कार्यों, दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण, उत्पादन, और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसमें कृषि मंत्री गणेश जोशी, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भुवन विक्रम डबराल और अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान के जरिए हर्बल क्षेत्र में नवाचार और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।

हर्बल और जड़ी-बूटी क्षेत्र में संभावनाओं को उजागर करते हुए, सरकार स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार का सृजन कर रही है, जिससे महिलाओं को आर्थिकी में जोड़ने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

इस प्रकार, उत्तराखंड में हर्बल इकोनॉमी के विकास में नवाचार, मूल्य संवर्धन और विपणन की रणनीतियों को लागू करने से समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके लिए सभी संबंधित विभागों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि हर्बल और जड़ी-बूटी क्षेत्र में उत्तराखंड एक प्रमुख स्थान प्राप्त कर सके।

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साभार, आविका शर्मा, Team India Twoday

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