रंगों के उत्सव में वोकल फॉर लोकल का जादू, देहरादून में छाएंगे प्राकृतिक रंग
ग्रामीण महिलाओं के हर्बल रंगों से महकेगी होली, घर-घर बिखरेगी खुशियों की बहार समूह की महिलाओं ने तैयार किए 2.5 कुंतल प्राकृतिक रंग, होली बाजार में बढ़ी रौनक रायपुर–सहसपुर में तैयार हो रहे हर्बल रंग, सुरक्षित होली की पहल वोकल फॉर लोकल’ की धूम, शहर में छाएंगे समूह के पर्यावरण-अनुकूल रंग देहरादून:रंगों के पावन पर्व […] The post वोकल फॉर लोकल’ की धूम, शहर में छाएंगे समूह के पर्यावरण-अनुकूल रंग first appeared on Vision 2020 News.
रंगों के उत्सव में वोकल फॉर लोकल का जादू, देहरादून में छाएंगे प्राकृतिक रंग
ग्रामीण महिलाओं के हर्बल रंगों से महकेगी होली, घर-घर बिखरेगी खुशियों की बहार
समूह की महिलाओं ने तैयार किए 2.5 कुंतल प्राकृतिक रंग, होली बाजार में बढ़ी रौनक
देहरादून: रंगों की पावन पर्व होली की तैयारी जोरों पर है। राजधानी देहरादून समेत आस-पास के क्षेत्रों में, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हर्बल रंगों की विशेषता अब बाजार में देखने को मिल रही है। इन रंगों का उपयोग न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोग हरित विकल्प का चयन करें। ब्रेकिंग न्यूज़, दैनिक अपडेट्स और विशेष कहानियाँ - इंडिया टुडे
देहरादून के विकासखंड सहसपुर और रायपुर में महिलाओं के समूह ने सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल रंगों का निर्माण किया है। इस वर्ष, ये हर्बल रंग करीब 30 महिलाओं द्वारा टेसू, गुलाब, हल्दी, चंदन, पालक, चुकंदर और मेहंदी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए गए हैं। ये रंग त्वचा के लिए पूर्णतः सुरक्षित हैं और बाजार में इन्हें खरीदारों की मांग के अनुरूप बेचा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं को इस कार्य में वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे उन्हें कच्चे माल और पैकेजिंग की व्यवस्था करने में मदद मिली है। इस योजना के अंतर्गत, समूह की महिलाओं ने लगभग 2.5 कुंटल प्राकृतिक रंग तैयार किए हैं, जो उन्हें प्रति किलोग्राम 100 से 120 रुपये तक का लाभ दे रहे हैं।
इस आंदोलन में शामिल महिलाओं का कहना है कि प्राकृतिक रंगों की बहार उन्हें रासायनिक रंगों की दुष्प्रभावों से बचाती है। इसके अलावा, यह पहल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ कर रही है। एक समूह सदस्य मीना ने कहा, "मुख्यमंत्री ने जो योजनाएँ चलाई हैं, उनसे हमें बेहतर अवसर मिले हैं। हम अब अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी पहचान बना रहे हैं।"
जिला मिशन प्रबंधक सोनम गुप्ता ने कहा कि समूह की महिलाएँ इस वर्ष होली पर्व पर हर्बल रंगों का निर्माण कर रही हैं, और ये सभी प्राकृतिक रंग स्थानीय बाजारों में विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। बाजार में बढ़ते हर्बल रंगों की मांग इस अनूठे प्रयास का प्रमाण है।
इस पहल के माध्यम से न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण का माध्यम भी बन रहा है। यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि किस प्रकार स्थानीय महिलाएँ अपनी क्षमता का उपयोग करके समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
कम शब्दों में कहें तो, ग्रामीण महिलाएँ अपनी मेहनत और कौशल का प्रदर्शन करते हुए सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल रंगों के साथ होली का पर्व मना रही हैं। इन रंगों में बसी खुशी और खुशबू हर घर में बिखरने की तैयारी है। इसके लिए और भी अपडेट्स के लिए, visit करें इंडिया टुडे.
Team India Twoday - Neha Sharma
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