राज्यपाल ने आईवीआरआई, मुक्तेश्वर में पशुधन विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का किया आह्वान

नैनीताल : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), मुक्तेश्वर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य […] The post राज्यपाल ने आईवीआरआई, मुक्तेश्वर का किया भ्रमण, विज्ञान आधारित पशुधन विकास और ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर दिया बल first appeared on Vision 2020 News.

Jun 16, 2026 - 18:27
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राज्यपाल ने आईवीआरआई, मुक्तेश्वर में पशुधन विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का किया आह्वान
नैनीताल : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आ

राज्यपाल ने आईवीआरआई, मुक्तेश्वर में पशुधन विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का किया आह्वान

नैनीताल : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), मुक्तेश्वर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेते हुए ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और अनुसंधान का असली मकसद समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रभाव तभी होता है जब इसका लाभ सीधे किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों तक पहुँचे।

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि आईवीआरआई, मुक्तेश्वर केवल एक अनुसंधान संस्थान नहीं हैं, बल्कि यह विज्ञान, सेवा और राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने संस्थान की गरिमामयी वैज्ञानिक परंपरा और खासकर पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा एवं पशुधन विकास में इसके योगदान की सराहना की।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। विशेषकर यह महिलाओं के लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से 'लैब टू लैंड' की अवधारणा को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उनका मानना है कि अनुसंधान के लाभ को दूरस्थ गांवों और सीमांत पशुपालकों तक विस्तारित होना चाहिए।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य पशुधन आधारित गतिविधियों को आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के व्यापक अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने आईवीआरआई से आग्रह किया कि वे युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता से जोड़ने के लिए विशेष पहल करें।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए, राज्यपाल ने 'वन हेल्थ' अवधारणा को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु, और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है, जिससे पशु स्वास्थ्य एवं जैव सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

उन्होंने उत्तराखण्ड की स्वदेशी पशु नस्लों, विशेष रूप से बद्री गाय और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने प्राकृतिक खेती और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण का महत्त्व भी बताया। राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), टेली-वेटरिनरी सेवाओं और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से दूरदराज के पशुपालकों तक विशेषज्ञ परामर्श और सेवाएं पहुँचाई जा सकती हैं।

युवा वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान को पूर्णता तभी मिलती है जब उसमें मानवीय पहलू जुड़ा होता है। उन्होंने उन्हें प्रेरित किया कि वे गांवों में जाकर किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को समझें और उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा में प्रयास करें।

कम शब्दों में कहें तो, यह कार्यक्रम न केवल विज्ञान के प्रति युवाओं को जागरूक करता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में भी एक कदम है। इसके माध्यम से ग्रामीण समुदायों को अपने सुधार के लिए एक नया मार्गदर्शन मिलेगा। विज्ञान और अनुसंधान का यह अभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए और आईवीआरआई जैसा संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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