सफलता बनाए रखना है चुनौती : डॉ. पंकज कुमार पांडेय का महत्वपूर्ण संदेश
छठे टॉपर्स कॉन्क्लेव में 31 स्कूलों के 306 मेधावी छात्र हुए सम्मानित देहरादून। उत्तराखंड शासन के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय (आईएएस) ने कहा कि सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण उसे लगातार बनाए रखना होता है। उन्होंने छात्रों से जीवन में निरंतर सीखते रहने, मौलिक सोच विकसित करने और अपने …
सफलता बनाए रखना है कठिनाई: डॉ. पंकज कुमार पांडेय का महत्वपूर्ण संदेश
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड शासन के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा है कि सफलता हासिल करना महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उसे बनाए रखना उससे भी ज्यादा कठिन होता है।
देहरादून। रविवार को आयोजित छठे टॉपर्स कॉन्क्लेव में 31 स्कूलों के 306 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. पंकज कुमार पांडेय (आईएएस) ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, मौलिक सोच विकसित करने और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का महत्व बताया। यह समारोह देहरादून के आईआरडीटी ऑडिटोरियम में यूकॉस्ट, डीआईटी यूनिवर्सिटी और दिव्य हिमगिरि के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया था।
सफलता की कुंजी: निरंतरता और मित्रता
डॉ. पांडेय ने कहा कि सफलता के पीछे केवल विद्यार्थी का योगदान नहीं होता, बल्कि उनके शिक्षकों और अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उनके पुत्र ने स्कूल टॉपर का सम्मान प्राप्त किया था, तब उन्हें भी गर्व महसूस हुआ था। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि कक्षा में टॉप करना जीवन में केवल एक शुरुआत है और उनके पास अभी भी अनेक लक्ष्य हैं जिन्हें उन्हें हासिल करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से सच्चे दोस्तों का साथ न छोड़ने की सलाह दी, क्योंकि स्कूली जीवन में बने रिश्ते जीवनभर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा, "आजकल की तेजी से बढ़ती दुनिया में अकेलेपन की समस्या न केवल युवाओं बल्कि सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। इसलिए रिश्तों को संजो कर रखना चाहिए।"
भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर
डॉ. पांडेय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी विकास पर भी जोर दिया, यह कहते हुए कि भविष्य उन लोगों का होगा जो मौलिक सोच और नवाचार की क्षमता रखते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे तकनीक का सकारात्मक उपयोग करें और जीवनभर सीखने की आदत विकसित करें।
डीआईटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जी. रघुराम के अनुसार, आज के समय में अवसरों की कोई कमी नहीं है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि शिक्षा कहां से प्राप्त की गई है, बल्कि यह ज्यादा मायने रखता है कि ज्ञान कितनी गहराई से प्राप्त किया गया है।
2047 का भारत: छात्रों की जिम्मेदारी
आईआईपी के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी छात्राओं को प्रेरित करने के लिए कविता का सहारा लिया और कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प 2047 तक पूर्ण करना हमारी नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
साइंस और नवाचार की ओर बढ़ते कदम
कार्यक्रम में यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) दुर्गेश पंत ने बयान दिया कि देहरादून देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों का केंद्र बन रहा है, और अगले वर्ष यहां देश की पांचवीं साइंस सिटी का उद्घाटन किया जाएगा। उन्होंने छात्रों को वैज्ञानिक संस्थानों का दौरा करने और अपने ज्ञान को विस्तारित करने के लिए प्रेरित किया।
कॉनक्लेव में 31 स्कूलों के टॉपर विद्यार्थियों को गोल्ड, सिल्वर, और ब्रॉन्ज मेडल के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 31 विद्यालयों को भी ‘बेस्ट स्कूल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कश्यप, दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डॉ. डी.एस. मान, तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. कुँवर राज अस्थाना ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। टॉपर्स कॉन्क्लेव की स्मारिका का विमोचन समारोह का एक महत्वपूर्ण भाग था।
इस कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. ओ.पी. नौटियाल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. डी.पी. उनियाल ने किया। समारोह में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रबंधन प्रतिनिधि, अभिभावक, और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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सादर, टीम इंडिया टुडे (स्नेहा शर्मा)
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