सितारगंज में रिश्वत लेते दो कर्मचारी गिरफ्तार, विजिलेंस टीम बंधक; जांच की शुरूआत
सितारगंज। ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में गुरुवार को विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के दौरान दो कर्मचारियों को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के बाद तहसील कर्मचारियों के विरोध के चलते विजिलेंस की 10 सदस्यीय टीम कई घंटों तक तहसील परिसर में ही घिरी रही। देर रात तक …
बड़ी खबर: सितारगंज तहसील में रिश्वत लेते दो कर्मचारी गिरफ्तार, विजिलेंस टीम को बना लिया बंधक
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कम शब्दों में कहें तो, सितारगंज तहसील में विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद तहसील कर्मचारियों ने विजिलेंस टीम को बंधक बना लिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
सितारगंज। ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में गुरुवार को विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के दौरान दो कर्मचारी, संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। विदित रहे कि कार्रवाई के बाद तहसील कर्मचारियों के विरोध के चलते विजिलेंस की 10 सदस्यीय टीम कई घंटों तक तहसील परिसर में ही घिरी रही। पुलिस प्रशासन को रातभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ताकि टीम को वहां से बाहर निकाला जा सके।
विजिलेंस की कार्रवाई का कारण
शिकायतकर्ता अवतार सिंह ने विजिलेंस से शिकायत की थी कि दोनों कर्मचारियों ने जमीन कुर्की की कार्रवाई रुकवाने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित ऋण की आरसी समाप्त कराने की एवज में रिश्वत की मांग की थी। आरोप है कि शुरू में रिश्वत की मांग 16 हजार रुपये थी, जिसे बाद में 14 हजार रुपये पर तय करने का सहमति बनी। विजिलेंस ने जांच के बाद दोनों कर्मचारियों को 14 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया और मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी।
कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
इस कार्रवाई के बाद तहसील कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेखपाल एवं संग्रह अमीन संघ के नेतृत्व में कर्मचारी मुख्य गेट बंद कर विजिलेंस टीम को परिसर से बाहर नहीं निकलने देने लगे। स्थिति गंभीर होने पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पृष्ठभूमि में बयान और दावे
तहसीलदार हिमांशु जोशी सहित कुछ कर्मचारियों ने विजिलेंस की कार्रवाई पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि बरामद धनराशि वास्तव में रिश्वत नहीं, बल्कि राजकीय राजस्व एवं केसीसी ऋण की वैध वसूली की राशि थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके साथ अनुचित कार्यवाही की है। वहीं, विजिलेंस टीम के प्रभारी प्रभात कुमार ने कहा कि सभी कार्यवाही साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इससे आपत्ति है, तो वे न्यायालय में अपनी बात रख सकते हैं।
राजस्व विभाग और विजिलेंस के बीच विवाद
घटना के बाद राजस्व विभाग और विजिलेंस के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। मामला उच्च पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में है और प्रशासनिक स्तर पर पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। इस घटना ने क्षेत्र में व्यापक चिंताओं को जन्म दिया है और यह सरकारी प्रशासन के कार्यों पर एक गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।
ठोस निष्कर्ष: यह घटना केवल एक भ्रष्टाचार के मामले नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की भी मांग करती है। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए, यहां क्लिक करें India Twoday.
संपादकीय: टीम इंडिया टुवडे, प्रिया शर्मा
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