देहरादून में 20 जुलाई के लिए रेड अलर्ट, प्रशासन ने चौकसी बढ़ाई, संवेदनशील क्षेत्रों में उपकरणों की तैनाती
देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा देहरादून जनपद के लिए आगामी दिनों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। 20 जुलाई के लिए जारी रेड अलर्ट को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों, नोडल अधिकारियों …
देहरादून में प्राकृतिक आपदाओं की तैयारियों में तेजी, 20 जुलाई के रेड अलर्ट की चेतावनी
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन पूरी तरह तैयार है। 20 जुलाई के रेड अलर्ट को देखते हुए सभी विभागों को सजग रहने का निर्देश दिया गया है।
देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने देहरादून जनपद के लिए अगले कुछ दिनों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई है। इस संदर्भ में 20 जुलाई के लिए जारी किए गए रेड अलर्ट के चलते जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी संबंधित विभागों, नोडल अधिकारियों और त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) को निर्देश दिए हैं कि वे 24 घंटे सतर्क रहें और किसी भी संभावित आपात स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
आपदा प्रबंधन प्रणालियों को किया गया सक्रिय
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, जिले का आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय किया गया है। अधिकारियों को सुनिश्चित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें और संभावित प्राकृतिक आपदाओं के लिए आवश्यक तैयारियों को समय पर पूरा करें।
मौसम पूर्वानुमान और तैयारियों का खाका
मौसमी चेतावनियों के अंतर्गत, मौसम विभाग ने 18 और 19 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट तथा 21 जुलाई के लिए फिर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान भारी बारिश, जलभराव, भूस्खलन और नदियों-नालों के जल स्तर में वृद्धि की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने भूस्खलन और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में जेसीबी, राहत बचाव के उपकरणों एवं आवश्यक मानव संसाधन की अग्रिम तैनाती के निर्देश दिए हैं, ताकि इमरजेंसी में राहत कार्य जल्दी शुरू हो सकें।
स्थानीय लोगों से सावधानी बरतने का अनुरोध
जिलाधिकारी ने आमजन से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा है कि वे अनावश्यक रूप से नदी-नालों, गादेरों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की ओर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इससे किसी भी संभावित खतरे से बचाव में मदद मिलेगी।
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टीम इंडिया टुडे, राधिका शर्मा
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