उत्तराखंड का ऐतिहासिक हरेला पर्व: 16 जुलाई से एक माह तक थीमैटिक पौधरोपण के साथ ईको-टूरिज्म को मिलेगा नया मोड़
देहरादून : उत्तराखंड की गौरवशाली संस्कृति और प्रकृति के जुड़ाव का प्रतीक ‘हरेला पर्व’ इस वर्ष ऐतिहासिक होने जा रहा है। राज्य की रजत जयंती (25वें वर्ष) के उपलक्ष्य में आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह लोक पर्व पूरे एक माह तक बेहद खास और यादगार अंदाज में मनाया जाएगा। इस बार दून […] The post 16 जुलाई से एक माह तक चलेगा हरेला पर्व, थीमैटिक पौधरोपण से ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड का ऐतिहासिक हरेला पर्व: 16 जुलाई से एक माह तक थीमैटिक पौधरोपण के साथ ईको-टूरिज्म को मिलेगा नया मोड़
देहरादून : उत्तराखंड की गौरवशाली संस्कृति और प्रकृति के जुड़ाव का प्रतीक ‘हरेला पर्व’ इस वर्ष एक विशेष धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। राज्य की रजत जयंती (25वें वर्ष) के उपलक्ष्य में, यह लोक पर्व आगामी 16 जुलाई से शुरू होगा और पूरे एक माह तक बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। इस वर्ष, दून जनपद में थीमैटिक यानी विषय-आधारित तरीके से पौधरोपण किया जाएगा, जिससे ईको-टूरिज्म को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
कम शब्दों में कहें तो, हरेला पर्व न केवल वृक्षारोपण का उत्सव है बल्कि यह समाज और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday. जानकारी के अनुसार, हरेला पर्व का आयोजन गांवों से लेकर शहरों तक बड़े उत्साह के साथ किया जाएगा। इस बार उत्तराखंड इसे एक जन-आंदोलन के रूप में पहचान दिलाने जा रहा है।
16 जुलाई से एक माह तक चलेगा हरेला पर्व
हरेला पर्व ने इस बार खास महत्व पा लिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत तैयारियों पर चर्चा की गई। डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष का महा-अभियान केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि धरती को हरा-भरा बनाने का एक जन आंदोलन होगा।
माइक्रो लेवल पर होगी तैयारी, जुड़ेंगे नामचीन संस्थान
जिलाधिकारी द्वारा सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्दी से अपनी रोपण साइट्स का चयन करें। इस अभियान को सफल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो ‘माइक्रो लेवल प्रबंधन’ के तहत कार्ययोजना तैयार करेगा।
इस महा-अभियान में आम जन मानस के अलावा जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिला समूहों और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, देश के प्रमुख संस्थानों जैसे आईएमए, सर्वे ऑफ इंडिया, ओएनजीसी और आईटीबीपी को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले में विशेष मिट्टी के अनुकूल उच्च गुणवत्ता वाले वन तैयार किए जा सकें।
5 साल तक होगी पौधों की देखभाल
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष जिले में 15.50 लाख पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य रखा गया है। विशेष बात यह है कि लगाए जाने वाले पौधों में 50 प्रतिशत फलदार और चारा प्रजातियों के होंगे। इन पौधों की केवल रोपण नहीं की जाएगी, बल्कि अगले 5 वर्षों तक उनके रखरखाव और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
10 जुलाई तक पूरी करनी होंगी तैयारियां
सभी रेखीय विभागों को आगामी 10 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई, जैविक खाद, ट्री-गार्ड और पौधों के परिवहन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग के चार प्रभागों यानी कृतमूरी, कालसी, चकराता और देहरादून के माध्यम से सभी विभागों को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस बार हरेला पर्व सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और उसकी हरित परंपराओं को सहेजने का एक प्रयास होने जा रहा है। इस पहल के माध्यम से न केवल पर्यावरण को सहेजने का कार्य किया जाएगा, बल्कि ईको-टूरिज्म को भी एक नई दिशा मिलेगी।
स्थानीय हितधारकों और आम जनता की सक्रियता के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पर्व प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को फिर से जीवित करेगा।
इसके लिए एक विशेष ‘हरित कंट्रोल रूम’ भी स्थापित किया जाएगा, ताकि पूरे महीने चलने वाले रोपण अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की जा सके।
इस पर्व की महत्ता को समझते हुए सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे इसमें बढ़चढ़कर भाग लें और अपनी जिम्मेदारियों का अहसास करें।
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सादर, सुमन शर्मा
Team India Twoday
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