उत्तराखंड की जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
रैबार डेस्क: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में... The post जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध-मुख्यमंत्री appeared first on Uttarakhand Raibar.
उत्तराखंड की जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की सरकार जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में चमोली में आयोजित एक कार्यक्रम में इस संबंध में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम 2026 के समापन समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं की घोषणा की, जिनसे जनजातीय समुदाय के जीवन स्तर में सुधार होगा।
सामुदायिक विकास के लिए योजनाएँ
मुख्यमंत्री ने नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास समेत भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण करने की बात कही। इसके अलावा, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में एक सामुदायिक भवन का निर्माण, स्व. श्रीमती गौरा देवी जी की प्रतिमा एवं पार्क का निर्माण, और बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण करने की घोषणाएँ भी की गईं। उन्होंने बताया कि बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए भी कार्य किए जाएंगे।
संस्कृति का संरक्षण और प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि जनजातीय समाज ने सदियों से अपने परंपराओं और प्रकृति संरक्षण के माध्यम से हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई-बहन देश के सजग प्रहरी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान और एकलव्य आदर्श विद्यालय। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
शिक्षा और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजाति समुदाय के बच्चों को प्राथमिक से स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्तियाँ और 16 स्थानों पर राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, जनजातीय बेटियों के विवाह के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए हर साल जनजातीय महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस साल टिम्मरसैंण महादेव के सौंदर्यकरण के लिए 26 करोड़, हीरामणि मंदिर के लिए 75 लाख और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के लिए 34 लाख की राशि जारी की गई है।
पारंपरिक ज्ञान को सहेजने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजातीय समुदाय की परंपराओं, लोकज्ञान और प्रकृति-संरक्षण की भावना से हमारी सभ्यता को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि माणा को देश के अंतिम गांव के बजाय पहले गांव की संज्ञा दी जानी चाहिए। इस दिशा में सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्हें बताया कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत 128 जनजातीय गांवों की पहचान की है, जहां बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही, कई स्थानों पर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्य भी जारी है।
स्वरोजगार और पर्यटन
मुख्यमंत्री ने कहा कि चमोली जनपद में 800 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे 4,000 से अधिक स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति भी पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण है।
अंत में, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड स्थापित किया गया है। इस प्रकार, राज्य सरकार जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने के लिए विविध योजनाओं को लागू कर रही है।
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टीम इंडिया टुडे - साक्षी शर्मा
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