उत्तराखंड की ट्राउट मछली का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बढ़ी वैश्विक मांग

रैबार डेस्क: उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है।... The post पहली बार इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची उत्तराखंड की ट्राउट मछली, विदेशों में बढ़ी डिमांड appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jun 27, 2026 - 09:27
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उत्तराखंड की ट्राउट मछली का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बढ़ी वैश्विक मांग

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट मछली ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना ली है। यह पहली बार है जब इस राज्य से ट्राउट मछली का सफलतापूर्वक निर्यात हुआ है।

रैबार डेस्क: उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य गठन के बाद पहली बार, राज्य में उत्पादित रेनबो ट्राउट मछली (Rainbow Trout Fish) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक दी है। पिथौरागढ़ जिले की तीन मत्स्य सहकारी समितियों द्वारा तैयार की गई लगभग 5 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का सफलतापूर्वक नेपाल निर्यात किया गया है। राज्य सरकार अब आने वाले दिनों में करीब 30 मीट्रिक टन मछली के निर्यात की तैयारी कर रही है। इस बारे में जानकारी देते हुए मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि यह मछली धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र की सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित की गई थी।

गुजरात में प्रोसेसिंग के बाद नेपाल पहुंची मछली

सरकार के अनुसार, कोल्ड-चेन व्यवस्था के तहत ट्राउट मछली को पहले गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां इसका प्रसंस्करण किया गया। इसके बाद 23 जून 2026 को इसे नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात किया गया। इस निर्यात से 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.50 लाख रुपये की आय हुई है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े हुए किसानों को आर्थिक लाभ मिला है।

सौरभ बहुगुणा ने बताया कि इस पहले अंतरराष्ट्रीय निर्यात की सफलता के लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन के लिए 5.40 लाख रुपये की गैप फंडिंग उपलब्ध कराई। इस प्रकार की पहल से उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

विदेशों में भारी डिमांड

मंत्री ने बताया कि इस सफल निर्यात का बड़ा कारण दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ संपर्क है। वर्तमान में, विभाग यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में उत्तराखंड की ट्राउट मछली पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए विभाग आने वाले समय में 30 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का निर्यात करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इससे राज्य के मत्स्य पालकों की आय बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की वैश्विक पहचान भी मजबूत होगी।

मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इसके साथ ही कहा कि वर्ष 2022 तक राज्य में 10,011 मत्स्य पालक थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं। वर्ष 2022-26 के दौरान राज्य में मत्स्य उत्पादन की वृद्धि दर 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 165 करोड़ रुपये है।

इस सफलता के पीछे की कहानी शानदार है और यह निश्चित रूप से उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र को एक नई दिशा देगी। इसके जरिए न केवल क्षेत्र के किसान लाभान्वित होंगे, बल्कि यह पूरे राज्य की आर्थिक विकास में भी योगदान करेगी।

इन सब बातों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड आज एक उभरते हुए मत्स्य पालन केंद्र के रूप में उभर रहा है, और इसके निर्यात की शुरुआत एक नई क्रांति की ओर इशारा करती है।

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अवश्य जानें: उत्तराखंड की ट्राउट मछली के निर्यात से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि यह राज्य की विश्व स्तर पर पहचान भी स्थापित करेगी।

लेखिका: नेहा शर्मा
टीम इंडिया ट्वोडे

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