उत्तराखंड में निखिल राणा को ‘बूट-बूटकुण’ कविता के लिए मिला द्वितीय स्थान
रवांई की माटी के दो होनहारों ने बढ़ाया क्षेत्र का मान, निखिल राणा और मन्नत रावत राज्य स्तर पर सम्मानित. पुरोला। रवांई क्षेत्र के लिए गौरव का एक और अवसर सामने आया है। राजकीय इंटर कॉलेज मोल्टाड़ी, पुरोला में कक्षा 11 में अध्ययनरत छात्र निखिल राणा ने उत्तराखण्ड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कविता …
उत्तराखंड में निखिल राणा को ‘बूट-बूटकुण’ कविता के लिए मिला द्वितीय स्थान
कम शब्दों में कहें तो, रवांई की माटी ने एक बार फिर अपने होनहार युवा छात्रों का नाम रोशन किया है। निखिल राणा और मन्नत रावत ने राज्य स्तर पर सम्मान पाकर क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
पुरोला। उत्तराखंड का रवांई क्षेत्र इस बार गर्व महसूस कर रहा है, क्योंकि राजकीय इंटर कॉलेज मोल्टाड़ी, पुरोला के कक्षा 11 के छात्र निखिल राणा ने उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कविता लेखन प्रतियोगिता में अपनी रवांल्टी कविता ‘बूट-बूटकुण’ के लिए द्वितीय स्थान हासिल किया है।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न भाषाओं में कविता, निबंध और एकांकी लेखन की प्रतियोगिताएं रखी गई थीं। नikhil की रचना ने निर्णायकों का ध्यान आकर्षित करने में सफलता पाई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें इस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्रदान किया गया। यह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरी रवांई की सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान भी है।
देहरादून में हुए एक भव्य सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निखिल राणा को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अध्ययन सामग्री, अंगवस्त्र और पांच हजार रुपये की नगद राशि देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, छावनी विधायक सविता कपूर, कृषि मंत्री गणेश जोशी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जगत सिंह बिष्ट और वरिष्ठ साहित्यकार जितेन ठाकुर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मन्नत रावत की भी बड़ी उपलब्धि
इसी प्रतियोगिता में कक्षा 10 की छात्रा मन्नत रावत ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने हिन्दी में एकांकी लेखन के लिए अपनी रचना ‘नदी जो अब भी बहती है’ से प्रथम पुरस्कार जीता। उन्हें सात हजार रुपये की धनराशि और अन्य पुरस्कार प्रदान किए गए।
एक ही क्षेत्र के दो होनहार छात्रों की इस सफलता ने पुरोला में खुशी की लहर दौड़ा दी है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों ने निखिल और मन्नत की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
रवांई क्षेत्र का गौरव
इस क्षेत्र के युवा प्रतिभाओं की यह उपलब्धियां न केवल उनके व्यक्तिगत और परिवारिक सरोकारों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह पूरी रवांई घाटी के लिए गर्व का विषय बन गई हैं। विशेष रूप से रवांल्टी भाषा जैसे सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण और संवर्धन मिलना, यह उसके महत्व को दर्शाता है।
स्थानीय भाषा और संस्कृति के प्रति इस प्रकार की निष्ठा और पहचान का निर्माण युवाओं के ज़रिए होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए संजीवनी का कार्य करेगा। इन युवाओं की उपलब्धियों पर गर्वित होकर क्षेत्रीय पहचान को और अधिक मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही, यह घटना अन्य छात्रों और युवाओं को प्रेरित करती है कि वे भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए तरक्की की ओर बढ़ें।
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यह रिपोर्ट आपके लिए लिखी है, स्नेहा कुमारी, टीम इंडिया टुडे
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