पिता का साया चला गया, लेकिन शिक्षा के नए रास्ते खुले; जिला प्रशासन का नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट
पापा की लाडलियों के सर से उठा पिता का साया; शिक्षा पर आया संकट तो अभिभावक बन जिला प्रशासन ने संभाली कमान; शिक्षा पुनर्जीवित असहाय, जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा की उड़ान को पंख लगाता जिला प्रशासन का प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’; अब तक 1 करोड़ से 120 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित शिक्षा ही एक ऐसा टूल; हथियार […] The post पापा की लाडलियों के सर से उठा पिता का साया, तो अभिभावक बन जिला प्रशासन ने संभाली कमान; शिक्षा पुनर्जीवित first appeared on Vision 2020 News.
पिता का साया चला गया, लेकिन शिक्षा के नए रास्ते खुले; जिला प्रशासन का नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट
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कम शब्दों में कहें तो, पिता का साया उठने के बाद जिला प्रशासन ने अभिभावक की भूमिका निभाई है और बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट 'नंदा-सुनंदा' शुरू किया है।
देहरादून में 'नंदा-सुनंदा' प्रोजेक्ट के अंतर्गत बालिकाओं की शिक्षा को पंख लगाने का कार्य किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की सहायता से अब तक 120 बालिकाओं को एक करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है।
जिला प्रशासन का अनूठा कदम
इस प्रोजेक्ट के 12वें संस्करण का उद्घाटन आज जिलाधिकारी सविन बसंल ने किया, जिसमें 26 बालिकाओं को उनके स्कूल फीस के लिए चेक वितरित किए गए। यह राशि सीधे स्कूल के खाते में ट्रांसफर की गई, जिससे बालिकाओं की शिक्षाएं फिर से शुरू हो सकें। आज जिन 26 बालिकाओं को लाभ मिला, उनमें 10 प्राथमिक स्तर, 8 माध्यमिक और 8 उच्च शिक्षा की छात्राएं शामिल थीं।
शिक्षा की कीमतें और बाधित शिक्षाएं
कु0 जिया, जिनकी बीफार्मा की पढ़ाई उनके पिता के निधन के बाद रुकी थी, को 39,500 रुपये की फीस मिलती है। वहीं कु0 अनुष्का प्रजापति, जो एमए प्रथम वर्ष की छात्रा हैं, उनके लिए प्रशासन ने 871450 रुपये की फीस दी। इस तरह की कई मौकों पर, कई बालिकाओं की शिक्षा, पारिवारिक आर्थिक समस्याओं के कारण बाधित हो गई थी।
प्रोजेक्ट 'नंदा-सुनंदा' का महत्व
जिलाधिकारी ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा, "शिक्षा एक ऐसा टूल है, जिससे हम सशक्तिकरण और सफलता के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।" इस योजना के तहत कई छात्राओं की आर्थिक स्थिति को देखने के बाद, जिला प्रशासन ने उनके लिए आवश्यक फीस का भुगतान किया।
सकारात्मक परिणाम और आगे की योजना
कु0 सृष्टि की शिक्षा को उनके पिता के कैंसर से लड़ाई के कारण बाधित कर दिया गया था। इसके बाद प्रशासन ने उनकी बीसीए की फीस का भुगतान किया। इसी तरह, कु0 पलक, जिनकी मां नर्सिंग होम में कार्यरत हैं, को भी इस प्रोजेक्ट से बल मिला।
प्रोजेक्ट के अंतर्गत सभी लाभान्वित छात्राओं ने जिलाधिकारी के सामने अपनी कठिनाइयों का विवरण पेश किया और उत्तराखंड की सरकार एवं प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित किया।
भविष्य की संभावनाएं
जिलाधिकारी ने बच्चों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट न केवल जरूरतमंद बालिकाओं के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इसे नीति में शामिल किया जाए ताकि सभी जरूरतमंद छात्राएं इस योजना से लाभान्वित हो सकें।
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टीम इंडिया टुडेस, स्नेहा शर्मा
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