पौड़ी में गुलदार का बढ़ता आतंक, अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बकरी की हत्या
रैबार डेस्क: उत्तराखंड के पहाड़ों में जंगली जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले... The post पौड़ी में गुलदार का आतंक जारी, इधर सांत्वना दे रहे थे अधिकारी, उधर पास के गांव में गुलदार ने बकरी को बनाया निवाला appeared first on Uttarakhand Raibar.
पौड़ी में गुलदार का बढ़ता आतंक, अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बकरी की हत्या
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में गुलदार के आतंक से लोग दहशत में हैं। अधिकारियों की संवेदना का कोई असर नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।
गुलदार का हमला उत्तराखंड में एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। पौड़ी जनपद मुख्यालय से सटे गजल्ट गांव के करीब ही स्थित सिरोली गांव में एक गंभीर घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार को गुलदार के हमले में मारे गए राजेंद्र नौटियाल के परिजनों को ढांढस बंधाने मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, और वनविभाग के अधिकारी सचिन एसएन पांडे गजल्ट गांव पहुंचे थे। लेकिन इसी दौरान सिरोली गांव में गुलदार ने एक बकरी को मार दिया और दूसरी को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आक्रोश और भी भड़का।
गुलदार का आतंक
कुछ दिन पहले, गजल्ट गांव में राजेंद्र नौटियाल को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया था। इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। वनविभाग ने अपनी ओर से बकरीदाल लगाकर शूटरों को तैनात किया है, लेकिन इससे गुलदार की सक्रियता कम होने का नाम नहीं ले रही है। अधिकारियों द्वारा दी गई सांत्वना को ग्रामीणों ने बेकार बताया है।
गांववाले यह दावा कर रहे हैं कि गजल्ट की घटना के बाद से सिरोली में लगातार गुलदार देखा जा रहा है। वहीं, वनविभाग का कहना है कि स्थिति सामान्य है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है। गुलदार को पकड़ने हेतु तैनात शूटर भी नाकाम साबित हो रहे हैं, जिसके कारण अब ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। इस मौके पर आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और गुलदार के हमले में घायल बकरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
स्थानीय निवासियों की मांग
ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि शूटरों की संख्या बढ़ाई जाए और प्राइवेट शूटरों को भी हायर किया जाए ताकि हत्यारे गुलदारों को समय पर नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, उन इलाकों में वन विभाग का गश्त बढ़ाने की भी मांग की जा रही है, जहाँ गुलदार की सक्रियता अधिक है।
ग्रामीणों का मानना है कि जब बड़े अधिकारी उस क्षेत्र में उपस्थित होते हैं, तब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, तो आम दिनों में उनकी सुरक्षा का क्या होगा? इस सवाल ने ग्रामीणों में एक गहरी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि उनकी जान और संपत्ति दोनों खतरे में है।
अब देखना यह होगा कि वे सरकार और विभाग इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक करते हैं और कब तक ग्रामीणों को इस अत्याचार से मुक्ति दिलाते हैं।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे, राधिका शर्मा
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