विधानसभा में स्वास्थ्य योजना पर विपक्ष का तगड़ा हमला, मंत्रियों को घेरा

उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे बजट सत्र में स्वास्थ्य योजना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। विपक्षी विधायकों ने राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड योजना) के अंशदान आधारित ढांचे पर सवाल उठाए, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनरों से मासिक अंशदान लिया जाता है, लेकिन इलाज पर होने वाला खर्च …

Mar 12, 2026 - 18:27
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विधानसभा में स्वास्थ्य योजना पर विपक्ष का तगड़ा हमला, मंत्रियों को घेरा
उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे बजट सत्र में स्वास्थ्य योजना को लेकर विपक्

विधानसभा में स्वास्थ्य योजना पर विपक्ष का तगड़ा हमला, मंत्रियों को घेरा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड विधानसभा में स्वास्थ्य योजना पर सवाल उठाने को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्षी विधायकों का आरोप है कि 'गोल्डन कार्ड योजना' के अंशदान आधारित ढांचे में अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य योजना को लेकर विपक्ष ने उत्तराखंड सरकार पर जोरदार हमला बोला। विपक्षी विधायकों ने राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड योजना) के अंशदान आधारित ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह योजना सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से मासिक अंशदान लेती है, लेकिन इलाज पर होने वाला खर्च इससे कहीं अधिक है, जिससे अनेक सवाल उठने लगे हैं।

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

सदन में विपक्ष ने सरकार से पूछे कि योजना के लिए कितनी धनराशि का प्रावधान किया गया है, कर्मचारियों का कितना योगदान आ रहा है, और तकनीकी कारणों से कितने दावों का अभी तक निपटारा नहीं हो सका। इसके साथ ही, मंत्रियों की ओर से प्रश्नों के जवाब देने में टालमटोल भी किया गया। यह स्थिति सदन में गर्म बहस का कारण बनी और विपक्ष ने बार-बार सटीक एवं स्पष्ट उत्तर की मांग की।

योजना की वर्तमान स्थिति

गोल्डन कार्ड योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध अस्पतालों में असीमित कैशलेस इलाज प्रदान करती है। वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 5.16 लाख गोल्डन कार्ड धारक हैं। इस योजना के अंतर्गत अब तक भर्ती इलाज पर 641 करोड़ रुपये से अधिक और ओपीडी पर 300 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है।

हालांकि, कर्मचारियों द्वारा दिए गए अंशदान इस खर्च के मुकाबले काफी कम हैं। इसके परिणामस्वरूप अस्पतालों के बकाया भुगतान में देरी हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अंशदान की तुलना में खर्च अधिक होने के कारण योजना पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके चलते तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से कई दावों का भुगतान भी लंबित है। यह स्थिति निश्चित रूप से योजना की भविष्य की संभावनाओं पर सवाल उठाती है।

गैरसैंण को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना

इस बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की चर्चा भी हुई। सरकार ने गैरसैंण को स्मार्ट सिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर जोर दिया है। अवस्थापना विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन स्थायी राजधानी की पूर्णता में अभी भी काफी समय लगेगा। यह विकास काफी संवेदनशील है और प्रदेशवासियों की उम्मीदें इससे जुड़ी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगर सरकार प्रदेश के विकास के लिए ठोस कदम उठाने में सफल होती है, तो इस योजना के जरिए वह समाज के सभी वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगी। हालांकि, इस दिशा में सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही भी रखनी होगी।

योजना की वर्तमान स्थिति और संभावनाओं पर नजर रखने की आवश्यकता है ताकि उत्तराखंड के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। इस मुद्दे पर गहरी चर्चा के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुविधाओं में सुधार लाने के लिए स्कूल, अस्पताल और विश्वविद्यालयों की ढांचागत स्थिति को भी सुधारना आवश्यक है।

इस प्रकार, स्वास्थ्य योजना और गैरसैंण के नगर विकास पर हुई चर्चाओं ने बजट सत्र को काफी गरमा दिया है। अधिक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें.

धन्यवाद,

Team India Twoday - Neha Sharma

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