श्मसान घाट में हुई विवाह समारोह: परंपरा या पागलपन?

रैबार डेस्क:  जब से प्रधानमंत्री नरोंद्र मोदी ने वेड इन उत्तराखंड का नारा दिया, उत्तराखंड... The post जहां होता है अंतिम संस्कार, वहां हुआ विवाह संस्कार, श्मसान में शादी का ये कैसा पागलपन? appeared first on Uttarakhand Raibar.

Apr 28, 2026 - 00:27
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जहां होता है अंतिम संस्कार, वहां हुआ विवाह संस्कार: श्मसान में शादी का ये कैसा पागलपन?

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में विवाह स्थल के नाम पर श्मसान घाट पर शादी का होना एक अनोखा और विवादास्पद मामला बन गया है। यह घटना जल्द ही चर्चा का विषय बन गई है और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

रैबार डेस्क: जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वेड इन उत्तराखंड' का नारा दिया है, उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन का क्रेज बढ़ा है। लेकिन हालिया एक घटना ने इस क्रेज को पागलपन की सीमा तक पहुंचा दिया है। रामनगर के निकट मर्चूला क्षेत्र में एक अजीब मामला सामने आया है, जहां श्मसान घाट पर शादी का भव्य मंडप सजाया गया और वहां विवाह संस्कार संपन्न कराया गया।

इस विचित्र शादी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। मर्चूला में पवित्र रामगंगा और बदनगढ़ नदी के संगम पर एक अंत्येष्टि स्थल है, जहां पर आमतौर पर अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन इसी स्थान पर एक नए जोड़े का विवाह समारोह आयोजित किया गया। सोचिए, जहां मृत आत्मा की शांति के लिए लोग प्रार्थना करते हैं, वहां नवविवाहित जोड़े को नए जीवन की शुभकामनाएं दी जा रही हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि श्मसान घाट पर फूलों से सजा सेटअप तैयार किया गया है और दूल्हा-दुल्हन आशीर्वाद लेते हुए खड़े हैं।

श्मसान घाट में हुई इस विचित्र शादी पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या पहाड़ में वेडिंग डेस्टिनेशन के नाम पर अब परंपराएं इस तरह से तोड़ी जाएंगी?

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता परम कांडपाल ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अंत्येष्टि स्थल पर विवाह समारोह “किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं” है। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने भी पूछा कि क्या डेस्टिनेशन वेडिंग के नाम पर सांस्कृतिक मर्यादाएं इस तरह से तोड़ी जाएंगी।

वर्तमान में प्रशासन भी इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। तहसीलदार का कहना है कि किसी रिजॉर्ट परिसर के बाहर सार्वजनिक स्थान पर समारोह के लिए अनुमति लेना आवश्यक है। हालांकि, इस मामले में प्रशासन को इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या रिजॉर्ट संचालक ने अनजाने में या जानबूझकर समारोह के लिए अनुमति दी थी, या यह पूरी तरह से वर-वधू की मर्जी से किया गया था।

बहरहाल, यह घटना हमारे समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या परंपराएं अब केवल एक व्यापार बन गई हैं? या फिर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को कहीं खोते जा रहे हैं? इस प्रकार की घटनाओं पर गहन विचार और चर्चाएँ की जाने की आवश्यकता है।

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सादर,

टीम इंडिया टुदे - सुधा शर्मा

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