सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूरी में एमडीडीए का सर्वे तेज, 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में

मसूरी : आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मसूरी में एमडीडीए ने सर्वे शुरू कर दिया है। 200 से अधिक प्रतिष्ठानों के जांच के दायरे में आने की संभावना के बीच होमस्टे और बीएनबी संचालकों की चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट […] The post सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूरी में एमडीडीए का सर्वे तेज, 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आने की संभावना first appeared on Vision 2020 News.

Oct 15, 2026 - 18:27
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूरी में एमडीडीए का सर्वे तेज, 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में
मसूरी : आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूरी में एमडीडीए का सर्वे तेज, 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में

मसूरी : आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मसूरी में एमडीडीए ने सर्वे शुरू कर दिया है। 200 से अधिक प्रतिष्ठानों के जांच के दायरे में आने की संभावना के बीच होमस्टे और बीएनबी संचालकों की चिंता बढ़ गई है।

कम शब्दों में कहें तो, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे व्यवसायों के संचालन पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय उद्योगों की स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

''Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday'' के तहत इस विक्रमण के चलते, मसूरी होमस्टे एसोसिएशन ने बैठक आयोजित की। इस मीटिंग में संचालकों ने स्वरोजगार बचाने के लिए स्पष्ट नीति और वन टाइम सेटलमेंट की मांग की। यहां यह सवाल भी उठाया गया कि आवासीय नक्शों पर व्यावसायिक गतिविधियों के चलने पर निगरानी तंत्र ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की थी। होमस्टे संचालकों का कहना है कि कई स्थानीय परिवार अपने घरों के कमरों में पर्यटकों को ठहराकर स्वरोजगार कर रहे हैं। इसके लिए कुछ लोगों ने बैंक से ऋण लिया है तो कई ने अपनी जमा-पूंजी लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूरी में एमडीडीए का सर्वे तेज

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद, मसूरी में एमडीडीए ने सर्वे को तेज कर दिया है। इस सर्वे के तहत 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि, इस कार्रवाई से होमस्टे और बीएनबी संचालकों में भय का माहौल है। संचालकों ने बताया कि यह व्यवसाय उनके लिए केवल आय का एक साधन नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के लिए यह एक स्थायी आजीविका भी है।

200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आने की संभावना

संचालकों का यह भी कहना था कि बड़े व्यावसायिक होटलों और घरों से संचालित होमस्टे को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। कई होमस्टे और बीएनबी संचालक उत्तराखंड सरकार की पर्यटन नीति के तहत पंजीकरण कराकर काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि नियमों की स्थिति स्पष्ट करते हुए संचालकों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए। भाजपा मसूरी मंडल के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी में मास्टर प्लान और भू-उपयोग संबंधी प्रावधानों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

MDDA की टीम स्वीकृत नक्शों और भवनों के वास्तविक उपयोग की कर रही है जांच

अधिवक्ता आर्यन देव उनियाल ने निर्देशित किया कि सरकार को जल्द ठोस नीति बनाने और वन टाइम सेटलमेंट जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए, ताकि नियमों के दायरे में आने वाले स्थानीय परिवारों का स्वरोजगार प्रभावित न हो। वर्तमान में, एमडीडीए की टीम स्वीकृत नक्शों और भवनों के वास्तविक उपयोग की जांच कर रही है। इस दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर नियमों का उल्लंघन लंबे समय से हो रहा था तो संबंधित प्रतिष्ठानों की पहचान समय रहते क्यों नहीं की गई। सर्वे में न केवल प्रतिष्ठानों की जांच आवश्यक है, बल्कि निगरानी व्यवस्था में संभावित चूक की पहचान भी महत्वपूर्ण है।

बहरहाल, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो न केवल स्थानीय व्यवसायों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी व्यापक असर डाल सकता है। अधिक अपडेट के लिए, यहाँ क्लिक करें.

हमारे इस मुद्दे पर आगे चर्चा की ज़रूरत है ताकि सही निर्णय लिए जा सकें।

सादर, टीम इंडिया टुडे - साक्षी शर्मा

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