हिमाचल में पूर्व विधायक के PSO होंगे सम्मानित:वीरता पदक के लिए नाम अनुशंसा करेगा विभाग; बिलासपुर गोलीकांड में बचाई बंबर की जान
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) संजीव कुमार को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया है। होली के दिन बिलासपुर में हुए गोलीकांड के दौरान उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए पूर्व विधायक बंबर ठाकुर की जान बचाई थी। इस गोलीकांड में संजीव कुमार को 2 गोलियां लगी थी। हिमाचल प्रदेश IPS एसोसिएशन ने PSO की वीरता की सराहना करते हुए 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। पुलिस विभाग ने उनके नाम की अनुशंसा पुलिस वीरता पदक (पीएमजी) के लिए की है। आरक्षी संजीव कुमार की समयोचित और निर्णायक कार्रवाई ने बड़ी जनहानि को टाला है। उनकी इस बहादुरी को देखते हुए पुलिस विभाग उनके नाम की औपचारिक अनुशंसा गृह मंत्रालय को भेजेगा। पुलिस महानिदेशक कार्यालय से जारी आदेशों में कहा गया कि संजीव कुमार ने कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर उत्कृष्टता का परिचय दिया है। वीरता पदक की अनुशंसा पर आगामी दिनों में आगे की जानकारी साझा की जाएगी। होली वाले दिन गोलीकांड में लगी दो गोली बता दें कि होली के दिन बिलासपुर में गोलीकांड हुआ था। दो शूटरों ने कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर उनकी पत्नी को मिले सरकारी आवास पर 24 राउंड फायर किए। जिसमें पूर्व विधायक बंबर ठाकुर को एक गोली और उनके PSO संजीव कुमार को दो गोली लगी। PSO का कुशल क्षेत्र जानने मुकेश अग्निहोत्री एम्स पहुंचे घायल संजीव कई दिनों से एम्स बिलासपुर में उपचाराधीन है। इस घटना पर प्रदेश में सियासत भी खूब हुई। विधानसभा में जमकर पक्ष विपक्ष में टकराव हुआ। इसी दौरान भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने पुलिस कर्मचारी का मसला सदन में उठाया। उन्होंने कहा, बंबर से मिलने सभी नेता आईजीएमसी पहुंचे। मगर पीएसओ संजीव कुमार का किसी ने हाल नहीं जाना। इसके बाद डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री खुद बिलासपुर पहुंचे और उन्होंने संजीव कुमार का हाल जाना। अब विभाग ने उन्हें प्रशस्ति पत्र जारी कर दिया है।

हिमाचल में पूर्व विधायक के PSO होंगे सम्मानित
हिमाचल प्रदेश के एक पूर्व विधायक के व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) को वीरता पदक से सम्मानित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह महत्वपूर्ण सम्मान उन्हें उस साहसिक कार्य के लिए दिया जाएगा, जिसमें उन्होंने हाल ही में बिलासपुर गोलीकांड के दौरान बंबर की जान बचाई। इस घटना ने न केवल संबंधित अधिकारियों की मुस्तैदी को उजागर किया बल्कि स्थानीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर्तव्यनिष्ठा की भावना को भी दर्शाया है।
वीरता पदक के लिए नाम अनुशंसा
राज्य का गृह विभाग अब इस बहादुरी के लिए PSO की अनुशंसा करेगा। इस प्रक्रिया में वे सभी प्रमाण और गवाहों का मूल्यांकन करेंगे जो उस दिन की घटनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान कर सकते हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, PSO ने न केवल गोलीबारी के समय स्थिति को नियंत्रित किया, बल्कि तुरंत निर्णय लेते हुए बंबर की जान बचाई, जो इस कृत्य की वीरता को दर्शाता है।
बिलासपुर गोलीकांड: एक नजर
बिलासपुर गोलीकांड ने पूरे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। PSO की घटनास्थल पर मौजूदगी और उनकी त्वरित प्रतिक्रिया ने सुनिश्चित किया कि मानव जीवन बच सके, जो कि किसी भी सुरक्षा बल के प्राथमिक उद्देश्य का हिस्सा है।
समुदाय में सुरक्षा की पूर्णता
यह सम्मान सिर्फ PSO के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक सन्देश है कि सुरक्षा बल निरंतर उनकी भलाई के लिए तत्पर रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कृत्य से न केवल PSO का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अन्य सुरक्षा कर्मियों को भी प्रेरित करेगा कि वे अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाएं।
क्षेत्रीय लोगों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही है। कई स्थानीय नागरिकों ने इसे एक साहसिक कदम बताया है और PSO के कार्यों की सराहना की है।
इस प्रक्रिया के तहत जब PSO को वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा, तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि अन्य सुरक्षा बलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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