शादी के 37 साल बाद भी बरकरार है अशोक और निवेदिता सराफ का जादू: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा का अद्भुत 'पावर कपल'
मराठी सिनेमा के सबसे चहेते और सदाबहार जोड़ों में से एक, अशोक सराफ (Ashok Saraf) और निवेदिता सराफ (Nivedita Saraf) अपनी शादी की 37वीं सालगिरह (37th Wedding Anniversary) मना रहे हैं। साल 1990 में गोवा के ऐतिहासिक मंगेशी मंदिर में सात फेरे लेने वाले इस जोड़े का रिश्ता आज भी भारतीय मनोरंजन जगत में प्यार, …
शादी के 37 साल बाद भी बरकरार है अशोक और निवेदिता सराफ का जादू: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा का अद्भुत 'पावर कपल'
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कम शब्दों में कहें तो, अशोक सराफ और निवेदिता सराफ ने अपनी शादी की 37वीं सालगिरह मनाई है। इस जोड़े का रिश्ता भारतीय मनोरंजन जगत में आज भी प्यार और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।
मराठी सिनेमा के सबसे प्रिय जोड़ों में से एक, अशोक और निवेदिता ने 1990 में गोवा के ऐतिहासिक मंगेशी मंदिर में अपने जीवन के सफर की शुरुआत की थी। इनकी प्रेम कहानी की खूबसूरती और स्टाइल आज भी सभी को प्रेरित करती है।
ऑन-स्क्रीन से ऑफ-स्क्रीन साथी होने का सफर
अशोक और निवेदिता की प्रेम कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने 'नवरी मिळे नवऱ्याला' (1984), 'धूम धडाका' (1985) और 'अशी ही बनवा बनवी' (1988) जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में एक साथ की हैं, जहां उनके बीच की केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
“दोस्ती ही हमारी ताकत है”
37 वर्षों के इस सफर पर निवेदिता ने एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि अशोक न केवल उनके जीवनसाथी हैं, बल्कि उनके सच्चे दोस्त और ताकत भी हैं। यह दोस्ती उनके रिश्ते की नींव है, जिसने उन्हें हर मुश्किल में साथ रखा।
उम्र के फासले को किया दूर
इस जोड़ी को प्रारंभिक दिनों में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें 18 साल का उम्र का अंतर शामिल था। परिवार के लोगों को उनकी शादी पर आपत्ति थी, लेकिन दोनों ने अपनी ताकत और प्यार के दम पर हर बाधा को पार कर लिया। आज उनके परिवार में एक बेटा अनिकेत सराफ भी है, जो अपने माता-पिता के रास्ते से दूर होकर एक सफल शेफ के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
हाल की उपलब्धियां: कान्स से पद्म श्री तक
इस 37वीं सालगिरह पर, अशोक और निवेदिता की खुशखबरी यह है कि ये जोड़ी एक नए प्रोजेक्ट में एक साथ वापसी करने जा रही है।
हाल ही में, इस जोड़े ने कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी उपस्थिति से हंगामा मचा दिया। अशोक पारंपरिक बंदगला सूट में रॉयल दिखे, जबकि निवेदिता ने शानदार पैठणी साड़ी पहनकर महाराष्ट्रीयन संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
अशोक सराफ के लिए एक और बड़ा सम्मान हाल ही में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म श्री पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए है, और इससे पहले उन्हें महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार भी मिल चुका है।
नवीन पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा
अशोक और निवेदिता सराफ की जोड़ी सिनेमा में ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी है। उनका प्यार और आपसी सम्मान नई पीढ़ी को सफल संबंधों का एक उदाहरण देता है।
अंत में, यह जोड़ा अपने अनुभवों और कड़ी मेहनत के जरिए यह साबित करता है कि प्यार और विश्वास के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी कहानी भारतीय मनोरंजन जगत में एक मिसाल बन गई है।
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