उत्तराखंड में वनाग्नि के खतरे के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट, 13 जिलों को किया गया प्रभावित
देहरादून : उत्तराखंड में वनाग्नि का खतरा बढ़ते हुए मौसम विभाग और वन विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। यह अलर्ट आज दोपहर 3:01 बजे से शुरू होकर 12 फरवरी को दोपहर 3:01 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रदेश के 13 जिलों के कई क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की संभावना …
उत्तराखंड में अगले 7 दिनों के लिए वनाग्नि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मौसम विभाग और वन विभाग द्वारा वनाग्नि के बढ़ते खतरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट की घोषणा की गई है, जो 12 फरवरी तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान 13 जिलों में आग लगने की संभावना उच्च बताई जा रही है।
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देहरादून : उत्तराखंड में बढ़ते वनाग्नि के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग और वन विभाग ने एक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट आज (5 फरवरी) दोपहर 3:01 बजे से प्रभावी होकर 12 फरवरी को दोपहर 3:01 बजे तक जारी रहेगा। इस समय में, राज्य के 13 जिलों के कई इलाके जंगलों में आग लगने की संभावना से जूझ रहे हैं।
ऑरेंज अलर्ट वाले जिले
संभावित आग से प्रभावित जिले निम्नलिखित हैं:
- अल्मोड़ा
- बागेश्वर
- चमोली
- चंपावत
- देहरादून
- हरिद्वार
- नैनीताल
- पौड़ी गढ़वाल
- पिथौरागढ़
- रुद्रप्रयाग
- टिहरी गढ़वाल
- उधम सिंह नगर
- उत्तरकाशी
अति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान
वन विभाग ने विशेष रूप से कुछ क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है, जहां आग लगने का जोखिम सबसे ज्यादा है। इन क्षेत्रों में पीपलकोटी, दसवां, तरतोली, सांजी, गौहाना और अंगथला शामिल हैं।
क्यों जारी किया गया अलर्ट?
यह अलर्ट हाल के सूखे मौसम, कम नमी स्तर और पिछले महीनों में हुई असामान्य आग की घटनाओं के चलते जारी किया गया है। वन विभाग का कहना है कि सर्दियों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं, और अगर इसे समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो आगे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सामाजिक जिम्मेदारी - जनता से अपील
जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने के लिए जनता से कई महत्वपूर्ण उपाय करने की अपील की गई है:
- कृपया जंगलों के आसपास आग न जलाएं।
- जलती बीड़ी, सिगरेट या माचिस का प्रयोग न करें।
- किसी भी तरह की आग या संदिग्ध धुआं दिखाई देने पर, तुरंत निकटतम वन कार्यालय, पुलिस, या आपातकालीन नंबर (112) पर सूचना दें।
सुरक्षा उपाय और वन विभाग की तैयारी
संकेत दिया गया है कि जंगलों में आग लगने की घटना को रोकने के लिए वन विभाग ने फायर लाइन तैयार करने, नियंत्रण जला की प्रक्रिया और ग्रामीण जागरूकता अभियानों को तेज करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में, राज्य के कई क्षेत्रों में वनाग्नि प्रबंधन के लिए विशेष टीमें पहले से तैनात की गई हैं। यह अलर्ट केवल वन संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
उत्तराखंड के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वनाग्नि न केवल जंगलों को नष्ट कर सकती है, बल्कि वन्यजीवों, स्थानीय समुदायों और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा होती है।
हर किसी से अनुरोध है कि वे सावधानी बरतें और आग से संबंधित खतरों के प्रति जागरूक रहें। इस दिशा में कोई भी सहायता आवश्यक हो, तो कृपया स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें।
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सादर,
टीम इंडिया टुडेज - राधिका शर्मा
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