बांग्लादेश में इस्लामी सरकार और शरिया के लिए कट्टरपंथी जुटे:शेख हसीना के हटने के बाद कट्टरपंथियों के निशाने पर अल्पसंख्यक और महिलाएं
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद पूर्व PM शेख हसीना को बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल करने में मदद करने वाले इस्लामी कट्टरपंथी अब अपने असली मकसद पर लौट आए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की अनदेखी के बीच इस्लामी कट्टरपंथी फिर से सक्रिय हो गए हैं। इन पर हसीना सरकार ने प्रतिबंध लगाए थे। वे बांग्लादेश को अधिक कट्टरपंथी दिशा में धकेलने के काम में जुट गए हैं। एक शहर में धार्मिक कट्टरपंथियों ने घोषणा की कि युवा महिलाएं अब फुटबॉल नहीं खेल सकतीं। दूसरे शहर में, उन्होंने पुलिस को एक ऐसे व्यक्ति को छोड़ने के लिए मजबूर किया जिसने सार्वजनिक रूप से अपने बाल न ढकने के कारण एक महिला को परेशान किया था, फिर उसे फूलों की माला पहनाई। इस्लामी सरकार के लिए ढाका में प्रदर्शन बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक रैली में कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस्लाम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा नहीं देती है, तो वे अपने हाथों से उसे मौत की सजा देंगे। नए संविधान का मसौदा तैयार कर रहे विभिन्न राजनीतिक दलों के अधिकारियों ने माना कि इस दस्तावेज में बांग्लादेश की परिभाषित विशेषता के रूप में धर्मनिरपेक्षता को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर बहुलवाद को स्थापित किया जाएगा बांग्लादेश में हसीना की सरकार गिरने के बाद रात को देशभर में अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय के पूजा स्थलों पर भीड़ ने हमले किए। अहमदिया समुदाय अभी भी डर में जी रहा है। उनके प्रार्थना हॉल में उपस्थिति लगभग आधी रह गई है। खुद ठगा हुआ महसूस कर रही हैं आंदोलन में शामिल छात्राएं कट्टरपंथियों की मनमानी से सबसे ज्यादा दुखी छात्राएं हैं, जिन्होंने हसीना को सत्ता से हटाने के आंदोलन में साथ दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि एकदलीय शासन की जगह लोकतांत्रिक खुलेपन की व्यवस्था लाएगा, लेकिन अब वे ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। ढाका यूनिवर्सिटी की 29 वर्षीय छात्रा शेख तस्नीम अफरोज एमी ने कहा, "हम विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे थे। हमने सड़क पर अपने भाइयों की रक्षा की। अब 5-6 महीने बाद पूरी बात बदल गई है।’ बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अहम स्थान हैं। देश के वर्क फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 37% हैं, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। महिलाकर्मियों को डर है कि 15 वर्षों के बाद चरमपंथी ताकतें सत्ता में आ जाती है तो उनके लिए चुनौतियां बढ़ जाएगी। ------------------------ बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेशी अंतरिम PM बोले- भारत के नॉर्थ ईस्ट राज्य लैंडलॉक्ड:उनके पास समुद्र तक पहुंचने का रास्ता नहीं, हमारे बैकयार्ड में समुद्र है बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस ने भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य को लैंड लॉक्ड (भूमि से घिरे हुए) बताया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उस पूरे इलाके के समुद्र का एकमात्र गार्डियन (संरक्षक) है। हमारे बैकयार्ड में समुद्र है। पूरी खबर यहां पढ़ें...

बांग्लादेश में इस्लामी सरकार और शरिया के लिए कट्टरपंथी जुटे: शेख हसीना के हटने के बाद कट्टरपंथियों के निशाने पर अल्पसंख्यक और महिलाएं
बांग्लादेश में हाल ही में राजनीतिक उथल-पुथल ने कट्टरपंथियों को नए सिरे से सक्रिय कर दिया है। शेख हसीना की सरकार के संभावित हटने के बाद, इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश में अल्पसंख्यक समुदायों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ा दी है। यह स्थिति न केवल राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दे रही है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी खतरे में डाल रही है।
कट्टरपंथियों का बढ़ता प्रभाव
देश में इस्लामी सरकार की मांग को लेकर कट्टरपंथी समूह तेजी से संगठित हो रहे हैं। ऐसे समूहों का एक प्रमुख लक्ष्य बांग्लादेश को शरिया कानून के तहत चलाना है। शेख हसीना के शासनकाल में लोकतंत्र को बनाए रखने के प्रयासों के बावजूद, इन कट्टरपंथियों की गतिविधियों ने नई लहर की चुनौती पेश की है।
अल्पसंख्यक और महिलाओं के अधिकार
बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लिए हालात बहुत ही चिंताजनक हो गए हैं। कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे हमलों और धमकियों ने इन समुदायों के जीवन को असुरक्षित बना दिया है। महिलाएं भी इस संकट की शिकार हो रही हैं, और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा रहा है।
सरकार की चुनौतियां
बांग्लादेश सरकार को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कई उपाय करने की आवश्यकता है। सुरक्षा बलों की सक्रियता और अल्पसंख्यक समुदायों के सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, समाज में सहिष्णुता और समानता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है।
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष में स्थानीय नागरिक समाज का समर्थन भी महत्वपूर्ण है। इतिहास से पता चलता है कि तबाही और विभाजन से बचने के लिए जन जागरूकता सबसे बड़ा उपकरण है।
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