देहरादून: पॉलीटेक्निक कॉलेज में नकल के आरोप पर छात्र की पिटाई, दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज
देहरादून। उत्तराखंड राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान, पित्थूवाला में परीक्षा के दौरान हुए विवाद के मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोतवाली पटेलनगर पुलिस के अनुसार, नेशविला रोड निवासी महेश कंडवाल ने शिकायत दर्ज कराई कि उनका पुत्र कबीर कंडवाल, जो संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग …
देहरादून में पॉलीटेक्निक कॉलेज में नकल के विरोध की कीमत चुकाई छात्र ने
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के एक पॉलीटेक्निक कॉलेज में नकल को रोकने पर एक छात्र को गंभीर रूप से पीटा गया है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर लिए हैं। यह मामला छात्रों के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या विद्यालयों में उचित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है।
मामले का प्रारंभ
देहरादून में स्थित उत्तराखंड राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान, पित्थूवाला में 4 जून को आयोजित परीक्षा के दौरान एक विवाद उत्पन्न हुआ। नेशविला रोड निवासी महेश कंडवाल ने कोतवाली पटेलनगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके पुत्र कबीर कंडवाल, जो कि सिविल इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष का छात्र हैं, ने परीक्षा में नकल कराने के प्रयास का विरोध किया।
मारपीट और धमकी का आरोप
महेश कंडवाल की शिकायत के अनुसार, कबीर कंडवाल के नकल का विरोध करने के बाद प्रभात खंडूरी, पवन कुमार, पीयूष काला और शिवानी नामक छात्रों ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। जबर्दस्ती बंधक बनाना और जान से मारने की धमकी देना भी आरोपों में शामिल है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
प्रधानाचार्य की शिकायत
वहीं, उत्तराखंड राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान के प्रधानाचार्य अवनीश जैन ने भी एक तहरीर देकर आरोप लगाया है कि महेश कंडवाल और उनके पुत्र कबीर ने परीक्षा में तैनात कर्मचारियों के साथ मारपीट की और सरकारी कार्य में बाधा डाली। उनकी शिकायत पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस कार्रवाई और जांच
पुलिस द्वारा दोनों मामलों में क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। अब इस मामले की विवेचनात्मक जांच जारी है, जिसमें दोनों पक्षों के गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि इस तरीके के मामलों पर नियंत्रण पाया जा सके।
शिक्षा संस्थानों में नकल पर नियंत्रण की जरूरत
यह घटना एक बार फिर से शिक्षा संस्थानों में नकल पर नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। जिन विद्यार्थियों ने ईमानदारी से परीक्षा में भाग लिया है, उन्हें न केवल सुरक्षित वातावरण में अध्ययन करने का अधिकार है, बल्कि उनकी मेहनत को भी सम्मानित किया जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि एक अनुशासित और सुरक्षात्मक शैक्षणिक माहौल का होना कितना आवश्यक है। विद्यार्थियों में एक दूसरों के प्रति सम्मान और सहानुभूति का भाव होना चाहिए, जिससे वे एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद कर सकें।
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Signed off by: स्नेहा शर्मा
Team India Twoday
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