लखनऊ में बिजली की डिमांड में बढ़ी:-22 हजार मेगावाट के पार हुई खपत; उपभोक्ता परिषद ने चेताया
लखनऊ में बढ़ती गर्मी के साथ अब बिजली की डिमांड बढ़ने लगी है। अप्रैल के पहले सप्ताह में ही डिमांड 22 हजार मेगावॉट के पार पहुंच गई है। जोकि आम दिनों में 20 मेगावॉट के अंदर रहती थी। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर पावर कॉरपोरेशन को एक बार फिर चेताया है कि इंतजाम अभी से शुरू करें अन्यथा गर्मियां उपभोक्ताओं के लिए काफी समस्या होगी। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही गर्मी का हाल बुरा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही ब्रेकडाउन शुरू हो गए हैं। कई इलाकों में बिजली समस्या की शिकायते आने लगी है। उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति करने के लिए पावर कॉरपोरेशन की नैतिक जिम्मेदारी है। हालांकि, सरकार और पावर कॉरपोरेशन इस वक्त निजीकरण में जुटी है। विद्युत वितरण विनियमन-2025 में निजीकरण के मामले पर चर्चा हो चुकी है, जिसके बाद उस हिस्से को नियामक आयोग ने हटा दिया है। ऐसे में अब तो यह साफ है कि निजीकरण न तो नीति संगत है और न ही उपभोक्तओं के हित में।

लखनऊ में बिजली की डिमांड में बढ़ी: 22 हजार मेगावाट के पार हुई खपत
हाल ही में लखनऊ में बिजली की डिमांड में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जो अब 22 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। इस वृहद वृद्धि ने उपभोक्ताओं और अधिकारियों दोनों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। उपभोक्ता परिषद ने इस बढ़ती खपत के मद्देनजर चेतावनी जारी की है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो विद्युत वितरण में असुविधाएं हो सकती हैं।
बिजली की मांग में वृद्धि
लखनऊ में बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक विकास के कारण बिजली की मांग में तेजी आई है। विशेषकर गर्मी के मौसम में, कूलर और एसी के उपयोग में वृद्धि के साथ-साथ घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में बिजली की खपत बढ़ी है। यह बार-बार की जाने वाली बिजली कटौती के मुद्दे से जूझने वाले उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों स्तरों पर बिजली की आपूर्ति को बनाए रखना आवश्यक है।
उपभोक्ता परिषद की चेतावनी
उपभोक्ता परिषद ने सरकार को इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने का सुझाव दिया है। परिषद का मानना है कि यदि बिजली की मांग में वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया, तो संभावित रूप से सिस्टम पर भारी दबाव डाला जा सकता है, जो कि बिजली कटौती और अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि उपभोक्ताओं को ऊर्जा संरक्षण की योजनाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
भविष्य के लिए उपाय
इस दिशा में स्थायी समाधानों की आवश्यकता है, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना और उपभोक्ताओं को ऊर्जा की बचत के लिए जागरूक करना। सरकार को चाहिए कि वे बिजली वितरण प्रणाली में सुधार करें और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में निवेश करें।
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