मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज से छेड़छाड़ का आरोप:एटा में पीड़िता ने कहा- सुरक्षा गार्ड ने ब्लड टेस्ट के दौरान दो बार बैड टच किया
एटा के वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज में एक महिला मरीज के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुरक्षा गार्ड सत्यपाल ने ब्लड टेस्ट के दौरान महिला को दो बार अनुचित तरीके से छुआ। घटना की जानकारी आशा कार्यकर्ता को मिली, जो पीड़िता की रिश्तेदार है। पीड़िता डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे ब्लड टेस्ट की जरूरत पड़ी। इसी दौरान सुरक्षा गार्ड ने यह घटना की। शर्म के कारण पीड़िता ने तुरंत किसी को नहीं बताया। बाद में उसने आशा कार्यकर्ता को इसकी जानकारी दी। आशा कार्यकर्ता ने अस्पताल में पहुंचकर इस घटना का विरोध किया और हंगामा किया। सूचना मिलते ही कोतवाली नगर पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। हालांकि अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज से छेड़छाड़ का आरोप
एटा में एक मेडिकल कॉलेज में एक महिला मरीज के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि सुरक्षा गार्ड ने उसके ब्लड टेस्ट के दौरान दो बार बैड टच किया। यह घटना न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा के प्रति समाज की नज़रिये को भी दर्शाती है।
घटना की विस्तृत जानकारी
पीड़िता ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वह आवश्यक जांच के लिए मेडिकल कॉलेज गई थी। जबकि वह जांच के लिए तैयार थी, तभी सुरक्षा गार्ड ने गलत तरीके से उसके身体 को छुआ। यह घटना न केवल शारीरिक छेड़छाड़ का मामला है, बल्कि यह महिला मरीजों के लिए एक गंभीर खतरा भी है। यह स्थिति अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था की कमी को उजागर करती है।
सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद से स्थानीय समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। जिले के लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। महिलाओं को उचित सुरक्षा प्रदान करने में लापरवाह स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
सुरक्षा की आवश्यकताएँ
अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड्स की भूमिका विशेष महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर महिला मरीजों के साथ। इस घटना के बाद, सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले हर व्यक्ति को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं का पुनर्मूल्यांकन करना आवश्यक है।
आगे की कार्रवाई
सरकारी अधिकारियों ने इस घटना की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है। पीड़िता का समर्थन करने वाले संगठन भी इस मामले में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं, ताकि पीड़ित महिलाओं की आवाज को मजबूती प्रदान की जा सके।
निष्कर्ष
मेडिकल कॉलेज में हुई यह घटना केवल एक व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक जागरूकता का विषय बन गई है। महिलाओं के प्रति सुरक्षा और सम्मान की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता अब अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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